राम मंदिर में फिर सक्रिय दिखे पूर्व महासचिव चंपत राय, तीन निलंबित कर्मचारी हुए बहाल
अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में एक बार फिर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मंदिर में चढ़ावे की राशि गायब होने के आरोपों के बाद महासचिव पद छोड़ने वाले चंपत राय अचानक तीर्थ यात्री सेवा केंद्र पहुंचे। पद त्यागने के बाद यह पहला मौका है जब वे परिसर में सक्रिय भूमिका में नजर आए। उनके साथ पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा भी मौजूद थे। उधर, ट्रस्ट के नए स्थाई महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के कार्यभार संभालते ही पूर्व में हटाए गए तीन कर्मचारियों को उनके पुराने पदों पर बहाल कर दिया गया है।
चंपत राय ने कर्मचारियों से की मुलाकात चंपत राय ने तीर्थ यात्री सेवा केंद्र पहुंचकर वहां मौजूद कर्मचारियों का कुशलक्षेम जाना। उन्होंने स्टाफ से बातचीत करते हुए भरोसा दिलाया कि काम में कोई भी समस्या आने पर वे निसंकोच उनसे संपर्क कर सकते हैं। यह गतिविधि ऐसे समय हुई है जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कमान अब पूरी तरह से नए स्थाई महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के हाथों में है।
नए नेतृत्व का बड़ा फैसला: तीन कर्मचारियों की वापसी चंपत राय की इस आवाजाही के साथ ट्रस्ट में एक और बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। विभिन्न शिकायतों और विवादों के कारण परिसर की व्यवस्थाओं से बाहर किए गए तीन कर्मियों—संदीप गुप्ता, केडी तिवारी और बजरंग पाठक—को उनके पुराने पदों पर वापस बुला लिया गया है। स्वामी गोविंद देव गिरि ने पदभार ग्रहण करने के बाद इन कर्मचारियों को राहत देते हुए पुनर्स्थापित करने का आदेश दिया।
विदेशी पर्यटक और महिला पुलिस अधिकारी से हुआ था विवाद बहाल किए गए कर्मचारियों में शामिल संदीप गुप्ता शहीद कारसेवक के पुत्र हैं। लॉकर व्यवस्था में तैनात संदीप को एक विदेशी महिला श्रद्धालु के साथ बहसबाजी के बाद सेवा से हटा दिया गया था। महिला की शिकायत पर तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने उन्हें नोटिस जारी किया था और जवाब संतोषजनक न मिलने पर कार्रवाई की गई थी। अब नए नेतृत्व के सामने सिफारिश रखे जाने के बाद उनकी दोबारा नियुक्ति हुई है।
वहीं, रामलला के आभूषणों के संरक्षक केडी तिवारी और प्रसाद प्रबंधन के प्रभारी बजरंग पाठक को एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ विवाद के बाद हटाया गया था। पुलिस अधिकारी ने मेहमानों के लिए बिना बारी के प्रसाद की मांग की थी। इसके जवाब में बजरंग पाठक ने ट्रस्ट के लिखित निर्देश की मांग कर दी, जिससे विवाद बढ़ गया और तत्कालीन प्रबंधन ने दोनों को उनके काम से हटा दिया था।
दान चोरी प्रकरण और चंपत राय का इस्तीफा राम मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी का मामला पिछले दिनों राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था। समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। शुरुआत में चंपत राय ने एक वीडियो जारी कर आरोपों को सिरे से खारिज किया था।
बाद में गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच में चोरी के आरोपों को सही पाया और लाखों रुपये की बरामदगी के वीडियो भी सार्वजनिक हुए। इस प्रकरण पर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘बड़ी डकैती’ करार दिया था। चौतरफा दबाव और किरकिरी के बाद आखिरकार चंपत राय को अपने महासचिव पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
