रायबरेली से शुरू हुई ‘PDA रथयात्रा’, गठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका की चर्चा तेज
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार (24 सितंबर) को रायबरेली से अपनी बहुचर्चित ‘पीडीए रथयात्रा’ की शुरुआत कर दी है। राजनीतिक दृष्टि से यह कदम इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि रायबरेली को कांग्रेस का सबसे मजबूत किला माना जाता है और वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी यहां से सांसद हैं।
अखिलेश यादव के इस दौरे में पार्टी संगठन को धार देने के साथ-साथ हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर जाना और पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करना शामिल है।
रायबरेली से ही शुरुआत क्यों?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यात्रा का तात्कालिक कारण उन परिवारों और कार्यकर्ताओं से मिलना है जो हालिया प्रशासनिक कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं। 17 सितंबर को रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्रसभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच तीखा विवाद हुआ था। इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भी टकराव हुआ था। ऐसे में अखिलेश का सीधे रायबरेली पहुंचना कार्यकर्ताओं में भरोसा जगाने की रणनीति का हिस्सा है।
सपा का कहना है कि प्रशासन या व्यवस्था से पीड़ित हर व्यक्ति उसके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के दायरे में आता है, लिहाजा इस यात्रा के जरिए पार्टी अपने सामाजिक समीकरणों को और मजबूत करना चाहती है।
2022 का विधानसभा गणित: 6 में से 4 सीटों पर जीती थी सपा
रायबरेली को इस यात्रा के शुरुआती पड़ाव के तौर पर चुनने के पीछे जिले का चुनावी गणित भी एक बड़ा कारण है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने रायबरेली जिले की 6 में से 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी:
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बछरावां: श्याम सुंदर भारती (सपा)
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हरचंदपुर: राहुल लोधी (सपा)
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सरेनी: देवेंद्र प्रताप सिंह (सपा)
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ऊंचाहार: मनोज कुमार पांडेय (सपा)
हालांकि, ऊंचाहार से जीते मनोज कुमार पांडेय बाद में भाजपा में शामिल हो गए। इसके बावजूद जिले में फिलहाल सपा के तीन मौजूदा विधायक हैं। आगामी 2027 के चुनाव को देखते हुए सपा ऊंचाहार सीट पर फिर से अपना दबदबा कायम करने की कोशिश में है।
गठबंधन में सीट बंटवारे और ‘बड़े भाई’ की भूमिका पर बहस
कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ में सपा की इस आक्रामक गतिविधि को दोनों दलों के बीच भविष्य के सीट बंटवारे के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। सियासी हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सपा इस यात्रा के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि भले ही लोकसभा में यह सीट कांग्रेस के पास हो, लेकिन विधानसभा स्तर पर जमीनी संगठन सपा का ही ज्यादा मजबूत है। 2022 के नतीजों को आगे रखकर सपा गठबंधन की बातचीत में अपनी मजबूत स्थिति और ‘बड़े भाई’ की भूमिका को रेखांकित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सामाजिक न्याय के प्रतीकों से सजा रथ
इस अभियान के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए रथ पर डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राम मनोहर लोहिया, जनेश्वर मिश्र, मुलायम सिंह यादव और बेनी प्रसाद वर्मा जैसे दिग्गजों की तस्वीरें और सामाजिक न्याय से जुड़े नारे लगाए गए हैं।
अखिलेश यादव रायबरेली में पीडीए रथ के जरिए कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी में जुटे हैं।
