September 15, 2026

रेबीज वैक्सीन Abhayrab का बैच फेल: डीसीजीआई ने राज्यों को दिए सतर्क रहने के निर्देश

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भारत में रेबीज से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रमुख वैक्सीन ‘Abhayrab’ को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। ड्रग रेगुलेटर ने इस वैक्सीन के एक खास बैच को जरूरी पोटेंसी टेस्ट (Potency Test) में फेल पाया है, जिसके बाद इसे ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (Not of Standard Quality) यानी तय गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने वाला घोषित किया गया है। साथ ही इसके नकली होने की भी गंभीर आशंका जताई जा रही है।

किस बैच पर है विवाद और क्या है मामला?

  • बैच नंबर: यह पूरा मामला Abhayrab के बैच नंबर KE25012 से जुड़ा हुआ है।

  • बरामदगी: अधिकारियों के अनुसार, इस बैच के कुछ वाइल्स दिल्ली के मुखर्जी नगर स्थित एक बिना लाइसेंस वाले परिसर से बरामद किए गए थे।

  • लैब जांच: जब इन सैंपल्स को केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कसौली में परीक्षण के लिए भेजा गया, तो वे पोटेंसी की अनिवार्य शर्तों को पूरा करने में असफल रहे। इसके बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के सहयोग से चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

कंपनी ने कहा- ये वाइल्स हमारे नहीं हैं वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ‘इंडियन इम्युनोलॉजिकल लिमिटेड’ (Indian Immunologicals Limited) ने स्पष्ट किया है कि जांच में मिले वाइल्स उनकी कंपनी द्वारा तैयार नहीं किए गए हैं।

  • कंपनी के मुताबिक, बरामद वाइल्स पर Abhayrab और बैच नंबर KE25012 लिखा जरूर है, लेकिन जब कंपनी के असली रिकॉर्ड और सुरक्षित रखे गए सैंपल से इनका मिलान किया गया, तो कुल 17 बड़े अंतर सामने आए।

  • लेबल, पैकेजिंग, QR कोड, कैप का रंग और लाइसेंस से जुड़ी जानकारियों में हेरफेर पाई गई है, जिससे यह अंदेशा है कि बाजार में नकली वैक्सीन खपाई जा रही थी।

DCGI के सख्त निर्देश और कंपनी का बयान मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को इस बैच की बिक्री और वितरण पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उनके अधिकृत चैनलों के जरिए सप्लाई की गई असली वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। मूल बैच के तहत कुल 83,370 वाइल्स अधिकृत चैनलों के जरिए बांटे गए थे।

गौरतलब है कि देश में रेबीज के कारण हर साल हजारों लोगों की जान जाती है (2024 के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 5,726 मौतें)। ऐसे में जीवनरक्षक वैक्सीन की गुणवत्ता से खिलवाड़ का यह मामला बेहद संवेदनशील है, जिसकी जांच एजेंसियां गहराई से पड़ताल कर रही हैं।