यूपी चुनाव 2027: झांसी की 4 विधानसभा सीटों पर BJP और विपक्ष की क्या होगी रणनीति?

yogi

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Election 2027) को लेकर बुंदेलखंड की सियासत में हलचल शुरू हो गई है। झांसी जिले की चारों विधानसभा सीटें—बबीना, झांसी नगर, मऊरानीपुर और गरौठा—राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम होने वाली हैं। 2022 के चुनाव में इन चारों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दल ने क्लीन स्वीप किया था। ऐसे में 2027 में भाजपा के सामने अपने इस गढ़ को बचाए रखने की बड़ी चुनौती होगी, जबकि समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस यहां सेंधमारी करने की कोशिश में जुट गई हैं।

झांसी जिले की चारों सीटों का सियासी समीकरण

1. बबीना: ग्रामीण और किसान वोटर्स पर नजर

बबीना विधानसभा सीट पर ग्रामीण मतदाताओं, किसानों और व्यापारियों का खासा प्रभाव है। 2022 में यहां से भाजपा के राजीव सिंह परीछा ने जीत दर्ज की थी। 2027 में भाजपा के लिए अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना एक चुनौती होगी। सपा और अन्य विपक्षी दल यहां रोजगार, महंगाई और ग्रामीण सुविधाओं के अभाव को मुद्दा बना सकते हैं। सपा को एक ऐसे चेहरे की तलाश होगी जिसकी स्थानीय पकड़ मजबूत हो, जबकि बसपा भी अपने कोर वोट बैंक को सहेजने की कोशिश करेगी।

2. झांसी नगर: BJP का मजबूत शहरी किला

झांसी नगर सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2022 में रवि शर्मा ने यहां से 76,353 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। 2027 में भाजपा यहां विकास, कानून-व्यवस्था और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर वोट मांगेगी। वहीं, विपक्ष को ट्रैफिक, जल निकासी और पर्यटन के विकास जैसे स्थानीय मुद्दों पर एक मजबूत विकल्प पेश करना होगा। सपा को इस सीट पर अपनी पैठ बनाने के लिए शहरी मध्यम वर्ग और व्यापारियों को साधना होगा।

3. मऊरानीपुर (सुरक्षित): दलित और ग्रामीण समीकरण

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मऊरानीपुर सीट से 2022 में भाजपा की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) की रश्मि आर्या ने चुनाव जीता था। यहां दलित मतदाताओं के साथ-साथ पिछड़े और ग्रामीण वोटर्स हार-जीत तय करते हैं। सिंचाई, पेयजल और किसानों की आय यहां बड़े चुनावी मुद्दे हैं। सपा अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए यहां पैठ बनाने की कोशिश करेगी, जबकि बसपा दलित स्वाभिमान के नाम पर वापसी का प्रयास करेगी।

4. गरौठा: कृषि और पलायन का मुद्दा हावी

गरौठा विधानसभा सीट ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र है। 2022 में भाजपा के जवाहर लाल राजपूत ने यह सीट जीती थी। यहां सिंचाई, बिजली, सड़कें और पलायन जैसे स्थानीय मुद्दे हावी रहेंगे। भाजपा की रणनीति बूथ स्तर पर अपनी पैठ और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के इर्द-गिर्द रहेगी। वहीं, विपक्ष किसानों की समस्याओं को उठाकर सत्ताधारी दल के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगा।

क्या होंगे 2027 के मुख्य मुद्दे?

झांसी की इन चारों सीटों पर बुंदेलखंड के चिर-परिचित मुद्दे—पेयजल संकट, बेरोजगारी, किसानों की समस्या और युवाओं का पलायन—अहम भूमिका निभाएंगे। भाजपा अपनी सरकार के विकास कार्यों और मजबूत संगठन के सहारे चुनावी मैदान में उतरेगी। दूसरी तरफ, सपा, बसपा और कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर, स्थानीय नाराजगी और मजबूत उम्मीदवारों के चयन पर ध्यान केंद्रित करना होगा।