आपकी रसोई तक पहुंच रहा सिलेंडर 370 रुपये सस्ता, हर घरेलू LPG गैस सिलेंडर पर कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान; जानें पूरी गणित

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दिसंबर 2026 में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर पर ‘अंडर-रिकवरी’ (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) में भारी बढ़ोतरी होने जा रही है। अनुमान है कि यह नुकसान मासिक आधार पर लगभग 13% बढ़कर 370 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच जाएगा।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के निदेशक (वित्त) अनुज जैन के अनुसार, नवंबर 2026 में एक घरेलू गैस सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी करीब 309 रुपये है, जो दिसंबर में और बढ़ जाएगी।

हर महीने बढ़ रहा है गैस कंपनियों का घाटा

अनुज जैन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘सऊदी सीपी’ (Saudi CP) की कीमतें बढ़कर 756 डॉलर प्रति टन हो गई हैं, जिसका सीधा असर भारत में गैस की लागत पर पड़ रहा है। अंडर-रिकवरी का यह ग्राफ तेजी से ऊपर गया है:

  • सितंबर 2026: 184 रुपये प्रति सिलेंडर

  • अक्टूबर 2026: 229 रुपये प्रति सिलेंडर

  • नवंबर 2026 (अनुमान): 309 रुपये प्रति सिलेंडर

  • दिसंबर 2026 (संभावना): 370 रुपये प्रति सिलेंडर

आखिर ‘अंडर रिकवरी’ का मतलब क्या है?

आसान भाषा में ‘अंडर-रिकवरी’ का मतलब उस नुकसान से है, जो तेल और गैस कंपनियों को एक सिलेंडर बेचने पर उठाना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में दिसंबर 2026 में एक घरेलू गैस सिलेंडर को तैयार करने और बेचने में IOCL, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों को जो कुल लागत आ रही है, वह उसकी तय बिक्री कीमत (जैसे दिल्ली में 942 रुपये) से 370 रुपये ज्यादा है।

सीधे शब्दों में कहें तो, आपके घर आने वाला गैस सिलेंडर अपनी असली कीमत से 370 रुपये सस्ता बिक रहा है और यह अंतर तेल कंपनियां अपनी जेब से भर रही हैं।

बाकी तेल कंपनियों का क्या है हाल?

इंडियन ऑयल के अलावा, अन्य दो सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों का भी हाल बेहाल है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) ने 17,334.40 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ने 18,048.82 करोड़ रुपये की भारी ‘अंडर-रिकवरी’ दर्ज की है।

कैसे भरपाई कर रही हैं तेल कंपनियां?

इतनी बड़ी अंडर-रिकवरी के कारण ये तेल कंपनियां पूरी तरह से केंद्र सरकार के वित्तीय पैकेज पर निर्भर हो गई हैं। जब तक सरकार से मुआवजा नहीं मिलता, तब तक ये कंपनियां ‘क्रॉस-सब्सिडी’ (Cross-Subsidization) का सहारा ले रही हैं। इसका मतलब है कि घरेलू गैस से हो रहे इस भारी नुकसान की भरपाई वे कमर्शियल एलपीजी, विमान ईंधन (Aviation Fuel) या रिफाइनिंग मार्जिन जैसे अपने अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों से होने वाले मुनाफे से कर रही हैं।