‘बुलडोजर घरों पर नहीं, इंसाफ पर चल रहा है…’ नूंह में गरजे महमूद मदनी
हरियाणा के नूंह में आयोजित ‘हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस’ में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी और मौलाना अरशद मदनी ने शिरकत की। इस सम्मेलन के दौरान मौलाना महमूद मदनी ने देश में मुसलमानों के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में मुसलमानों के लिए हालात तंग करने की कोशिश की जा रही है और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की साजिशें हो रही हैं।
महमूद मदनी ने कड़े शब्दों में कहा, “हम किरायेदार नहीं, बल्कि इस देश के हिस्सेदार हैं। यह देश हमारा है और हम किसी राजनीतिक पार्टी के एहसान से यहां नहीं हैं। हमारे बुजुर्गों ने इस देश के लिए कुर्बानियां दी हैं।”
‘क्या इस देश में मुसलमान होना जुर्म है?’
महमूद मदनी ने बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “कुछ लोग बुलडोजर को ही इंसाफ मानने लगे हैं, जबकि बुलडोजर किसी गारे या सीमेंट से बने घर पर नहीं, बल्कि इंसाफ पर चलता है।”
उन्होंने आगे कहा कि अब लोगों के कानों में यह सवाल गूंजने लगा है कि क्या इस देश में मुसलमान होना जुर्म है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें वोटों के चक्कर में बहुसंख्यक समाज को अचानक खतरे में बता रही हैं। उन्होंने सवाल किया, “100 करोड़ की आबादी अचानक खतरे में कैसे आ गई?” मदनी ने नेशनल मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उसका काम सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ झूठ फैलाना रह गया है।
‘नफरत की सियासत देश को खोखला कर रही’
कॉन्फ्रेंस में मौलाना अरशद मदनी ने भी देश में बढ़ती सांप्रदायिकता पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “जमीयत हमेशा प्यार और मोहब्बत का पैगाम देती है। मुल्क में जो नफरत की आग बरस रही है, अगर उस पर पानी नहीं छिड़का गया तो यह खत्म नहीं होगी। नफरत को बुनियाद बनाकर सियासत करना देश को खोखला करने जैसा है।”
धार्मिक मुद्दों पर बोलते हुए अरशद मदनी ने कहा कि जो लोग ‘ओम’ को सबसे बड़ा बताते हैं, हम भी ‘अल्लाह’ को सबसे बड़ा मानते हैं। उन्होंने कहा, “ओम और अल्लाह के संदेश को समझने की जरूरत है। अगर लोगों को अजान का मतलब पता होता, तो वे उसका विरोध नहीं करते।”
आजम खान की यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई को बताया गलत
रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई के सवाल पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि आजम खान एक राजनीतिक व्यक्ति हैं, लेकिन इमारत को गिरा देना गलत है। उन्होंने कहा, “अगर कोई गलती हुई है तो जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इमारत को ही गिरा दिया जाए।” इसे उन्होंने नफरत की राजनीति से जोड़ा।
ज्ञानवापी मामले में बातचीत से समाधान निकालने के सवाल पर अरशद मदनी ने कहा कि इसमें कोर्ट को अपनी भूमिका निभानी चाहिए और देश के कानून के हिसाब से फैसला करना चाहिए।
