नेतन्याहू हारे तो भी भारत के साथ मजबूत ही रहेंगे इजरायल के रिश्ते, नई सरकार को लेकर भारत की ये हैं उम्मीदें

Benjamin Netanyahu

इजरायल में संसदीय (नेसेट) चुनावों (Israel Elections) के लिए मतदान संपन्न हो चुका है और इस बार 1999 के बाद रिकॉर्ड 77.7 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है। सरकार बनाने के लिए नेसेट की 120 में से 61 सीटों का बहुमत आवश्यक है, लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है और बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के चुनाव हारने की संभावना जताई जा रही है। 30 अक्टूबर को अंतिम परिणाम घोषित होने पर तस्वीर साफ हो जाएगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और नेतन्याहू के बीच बहुत मजबूत व्यक्तिगत तालमेल रहा है। अगर नेतन्याहू चुनाव हार भी जाते हैं, तो भारत सरकार को इजरायल की नई सरकार के साथ नए सिरे से कूटनीतिक और व्यक्तिगत संबंध स्थापित करने होंगे, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों पर इसका कोई नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है।

भारत के साथ रिश्ते और व्यापार मजबूत रहने की उम्मीद

एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू की हार से भारत और इजरायल के बीच पहले से हुए 16 समझौतों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। भारत को उम्मीद है कि नई सरकार इन द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करेगी और उन्हें लागू रखेगी।

  • वर्क वीजा: इजरायल द्वारा भारत के करीब 50,000 श्रमिकों को वर्क वीजा देने के फैसले को नई सरकार भी पूरा कर सकती है।

  • प्राथमिकता वाले क्षेत्र: कृषि, जल प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हुए समझौतों को नई सरकार प्राथमिकता दे सकती है।

  • रक्षा और तकनीक: इजरायल से भारत को आधुनिक रक्षा उपकरण, ड्रोन, एयर डिफेंस और साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी मिलती रही है, जिसके आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

रिश्ते तोड़ने का जोखिम नहीं उठाएगी नई सरकार

भारत और इजरायल के बीच राजनीतिक, राजनयिक, आर्थिक, रक्षा और सामरिक संबंध बहुत पुराने और मजबूत हैं। ये रक्षा और तकनीकी संबंध केवल राष्ट्राध्यक्षों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों की सेनाओं, सरकारी संस्थानों और कंपनियों के बीच संस्थागत समझौतों पर आधारित हैं। ऐसे में किसी भी नई सरकार के लिए इतने बड़े रक्षा और व्यापारिक प्रोजेक्ट्स को अचानक रोकना संभव नहीं है।

कूटनीतिक स्तर पर, भारत हमेशा इजरायल और खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को संतुलित करता रहा है। अगर इजरायल की नई सरकार क्षेत्रीय तनाव कम करने या कूटनीति पर ज्यादा जोर देती है, तो इसका सीधा फायदा भारत को भी होगा।

भारत और इजरायल का बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार

हाल ही में (जुलाई 2026 में) भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ है।

  • निवेश समझौता: 8 सितंबर 2025 को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जो अब आधिकारिक रूप से लागू है (इसने 1996 के पुराने समझौते को रिप्लेस किया है)।

  • व्यापार के आंकड़े: वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 3.93 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार दर्ज किया गया।

  • आयात-निर्यात: भारत, इजरायल को इंजीनियरिंग का सामान, रसायन, कपड़ा और मशीनरी का निर्यात करता है, जबकि इजरायल से रसायन, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों का आयात करता है।