नागौर: सरपंच चुनाव हारने वाली चिड़ी देवी को गांव वालों ने दिए 25 लाख रुपए, पेश की एकता की मिसाल
चुनावों के नतीजे अक्सर रिश्तों में दूरियां और कड़वाहट पैदा कर देते हैं, लेकिन राजस्थान के नागौर जिले के मोड़ी गांव ने सामाजिक एकता और भाईचारे की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। मुंडवा पंचायत समिति के भदौरा ग्राम पंचायत के राजस्व गांव मोड़ी में सरपंच चुनाव में हार का सामना करने वाली प्रत्याशी चिड़ी देवी के परिवार को निराश छोड़ने के बजाय, ग्रामीणों ने एकजुट होकर 25 लाख रुपये की सहयोग राशि भेंट की।
36 कौम के लोगों ने बनाया था अपना प्रत्याशी
मोड़ी गांव के 36 कौम (सभी समुदायों) के ग्रामीणों ने एक साधारण परिवार से आने वाले हेमाराम राव की पत्नी चिड़ी देवी को सरपंच पद का प्रत्याशी बनाया था। पूरे गांव ने एकजुट होकर उनके पक्ष में जोर-शोर से प्रचार किया और मतदान भी किया, लेकिन चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव हारने पर ग्रामीणों ने की अनूठी पहल
चुनाव परिणाम के बाद ग्रामीणों ने एक अनूठी और सकारात्मक पहल की। गांव में एक बड़ी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न समाजों के लोगों ने आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा किया। इसके बाद, हेमाराम राव के परिवार को सम्मानपूर्वक 25 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि भेंट की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य परिवार के प्रति अपना पूरा समर्थन जताना और चुनाव के दौरान पड़े आर्थिक बोझ को कम करने में मदद करना था।
‘गांव के प्यार ने दूर की निराशा’
ग्रामीणों के इस अप्रत्याशित सहयोग से चिड़ी देवी के पति हेमाराम राव बेहद भावुक हो गए। उन्होंने पूरे गांव का आभार जताते हुए कहा कि सरपंच नहीं बन पाने का थोड़ा मलाल जरूर था, लेकिन गांव वालों ने जो प्यार, विश्वास और सहयोग दिखाया है, उसने सारी निराशा को खुशी और गर्व में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद और प्रतिष्ठा से कहीं बढ़कर पूरे गांव का यह साथ और अपनापन है।
इसी कार्यक्रम के दौरान वार्ड नंबर 5 और 6 से नवनिर्वाचित वार्ड पंच सहदेवराम गोलिया और जगराम गोलिया को भी साफा पहनाकर सम्मानित किया गया।
मोड़ी गांव ने दिया समाज को बड़ा संदेश
मोड़ी गांव की यह कहानी बताती है कि लोकतंत्र में चुनावी मुकाबला सिर्फ एक प्रक्रिया है, लेकिन सामाजिक रिश्ते और आपसी भाईचारा उससे कहीं ऊपर होते हैं। जहां हार के बाद भी पूरा गांव एक परिवार के समर्थन में मजबूती से खड़ा हो जाए, वहां एकजुटता सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि समाज की सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। संदेश बिल्कुल साफ है—सरपंच की कुर्सी भले ही न मिली हो, लेकिन चिड़ी देवी और उनके परिवार ने पूरे गांव का दिल जरूर जीत लिया है।
