परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का नंबर गेम, क्या अखिलेश यादव की सपा बनेगी मददगार?
परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश में है। सपा और DMK जैसे दलों का रुख अहम माना जा रहा है।
संसद के मॉनसून सत्र का सत्रावसान अभी नहीं हुआ है, इसलिए विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना भी बनी हुई है, और रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार इसी बीच परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल को पास कराना चाहती है। सरकार के पास इसके लिए जरूरी संख्या बल फिलहाल नहीं है, लेकिन मोदी सरकार को भरोसा है कि इसे पास कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत हासिल किया जा सकता है।
संविधान संशोधन के लिए एनडीए को 360 वोट की जरूरत
लोकसभा की तीन सीटें खाली होने की वजह से इस समय सदन में कुल 540 सांसद हैं, और अगर सभी सांसद सदन में मौजूद रहकर वोटिंग में हिस्सा लेते हैं तो संविधान संशोधन पास कराने के लिए एनडीए को 360 वोटों की जरूरत पड़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इसके लिए डीएमके, एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), ओवैसी की एआईएमआईएम, बीजेडी और वाईएसआरसीपी के संपर्क में है, और इस सूची में विपक्षी गठबंधन का अहम हिस्सा मानी जाने वाली समाजवादी पार्टी भी शामिल बताई जा रही है।
लोकसभा और राज्यसभा में एनडीए का मौजूदा आंकड़ा
रिपोर्ट के अनुसार एनडीए के पास अभी 320 सांसदों का समर्थन है, जिनमें टीएमसी के 20 बागी सांसद, शिवसेना के 6 सांसद और शिरोमणि अकाली दल का एक सांसद शामिल हैं, जबकि वाईएसआरसीपी के 4 सांसद भी अब तक सरकार के साथ खड़े रहे हैं। हालांकि अब स्थिति में कुछ बदलाव के संकेत दिख रहे हैं, और अगर ये सभी सांसद बिल के पक्ष में वोट करते हैं तो एनडीए के पास 324 वोट हो जाएंगे। राज्यसभा में 244 सदस्यों में से 164 वोटों की जरूरत है, जबकि इस समय एनडीए को वहां 158 सांसदों का समर्थन मिलता दिख रहा है।
डीएमके, सपा और वाईएसआरसीपी के रुख में बदलाव के संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक डीएमके ने साफ कर दिया है कि तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस के साथ बने रहना उसे सहज नहीं लग रहा है, जबकि इमरान मसूद जैसे नेताओं के हमलों से समाजवादी पार्टी असहज हो रही है। वाईएसआरसीपी भी अपनी स्थिति पर दोबारा विचार कर रही है, क्योंकि जगन मोहन रेड्डी ने हाल ही में कहा है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून का समर्थन करने का उनकी पार्टी का फैसला गलत था। इन सभी दलों के पास लोकसभा में 81 और राज्यसभा में 23 सांसद हैं, और इस संख्या को एनडीए के मौजूदा आंकड़ों में जोड़ दिया जाए तो रिपोर्ट के अनुसार दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा आसानी से हासिल किया जा सकता है, क्योंकि तब लोकसभा में बिल के समर्थन में 401 और राज्यसभा में 181 सांसद हो सकते हैं।
डीएमके के हालिया कदमों से एनडीए की चिंता बढ़ी
डीएमके ने हाल ही में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है, और पार्टी ने तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन विरोधी बिल के प्रस्ताव का समर्थन करने के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी पक्ष लिया था। इसके बावजूद बीजेपी को उम्मीद है कि सीटों पर 50% की सीमा तय किए जाने से डीएमके बिल पर सहमत हो जाएगी, जबकि डीएमके के सूत्रों का कहना है कि जब तक पार्टी यह नहीं देख लेती कि बिल में क्या लिखा है, तब तक वह न कोई वादा करेगी और न ही इस पर कोई टिप्पणी करेगी।
अखिलेश से भी बीजेपी को उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, सपा कांग्रेस से नाराज दिख रही है, इसलिए बीजेपी को अखिलेश से भी उम्मीदें हैं, और बताया जा रहा है कि एनडीए के फ्लोर लीडर वोटिंग के दौरान उनसे वोटिंग से दूर रहने के लिए कह सकते हैं।
30 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच का समय अहम
एनडीए के रणनीतिकारों के लिए अगला हफ्ता बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई तरह के समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं, और रिपोर्ट के मुताबिक अगर 30 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच का समय निकल गया तो सरकार के परिसीमन एजेंडे के सामने चुनौतियां कई गुना बढ़ जाएंगी।
