टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: तिहाड़ से जुड़ी तार, विकास कालिया और हथियारों की तस्करी… आखिर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कैसे जुड़ रहे बिहार के युवा?
मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi Gang) का नाम आने और बिहार के बेगूसराय निवासी ऋतिक की कथित संलिप्तता के बाद, बिहार का गैंगस्टर कनेक्शन एक बार फिर सुर्खियों में है। ऋतिक के परिजनों के मुताबिक, वह कमाने के लिए मुंबई गया था। लेकिन यह सिर्फ ऋतिक का मामला नहीं है। इससे पहले बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और सलमान खान के घर के बाहर हुई फायरिंग में भी बिहार से जुड़े शूटरों के नाम सामने आ चुके हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले बिहार के युवा लॉरेंस बिश्नोई जैसे बड़े आपराधिक गिरोहों के संपर्क में कैसे आ रहे हैं?
तिहाड़ जेल से हुई थी कनेक्शन की शुरुआत
पुलिस और जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का बिहार में नेटवर्क फैलाने में सीतामढ़ी के कुख्यात गैंगस्टर विकास कालिया की अहम भूमिका मानी जाती है। दावा किया जाता है कि विकास कालिया और लॉरेंस बिश्नोई की पहली मुलाकात दिल्ली की तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में हुई थी।
इसी मुलाकात के बाद दोनों गिरोहों के बीच संपर्क बढ़ा। आरोप है कि विकास कालिया ने ही बिहार के कई शूटरों को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जोड़ा। इसके बदले में बिश्नोई गैंग ने बिहार के स्थानीय आपराधिक गुटों तक विदेशी और आधुनिक हथियार पहुंचाने का नेटवर्क तैयार किया।
इन 5 जिलों में फैला है गैंग का जाल
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित बिहार कनेक्शन की परतें खोलने पर मुख्य रूप से पांच जिलों—बेगूसराय, सीतामढ़ी, मोतिहारी, बेतिया और गोपालगंज—के नाम प्रमुखता से सामने आते हैं। इन जिलों से लगातार कई संदिग्धों की गिरफ्तारी और हथियार तस्करी के मामले सामने आए हैं।
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पटना में मुठभेड़: जनवरी 2026 में पटना में पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरोह के सदस्यों से मुठभेड़ हुई थी, जिसमें चार लोग गिरफ्तार हुए थे। इनमें से परमानंद यादव को गिरोह का कथित ‘बिहार प्रभारी’ बताया गया था।
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मुजफ्फरपुर से 2 शार्प शूटर गिरफ्तार: मुजफ्फरपुर में सीतामढ़ी रोड पर एक बस से सुनील बारोलिया (जयपुर निवासी) और शहनवाज शाहिद (सीतामढ़ी निवासी) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, हरियाणा, राजस्थान और यूपी में वांछित ये दोनों शार्प शूटर नेपाल भागने की फिराक में थे।
विदेशी हथियारों की तस्करी का बड़ा नेक्सस
बिहार के शूटरों के साथ-साथ यह नेटवर्क विदेशी हथियारों की तस्करी से भी गहराई से जुड़ा है। इसी साल 22 जुलाई को गोपालगंज पुलिस ने बलथरी चेकपोस्ट पर नागालैंड नंबर की एक बस से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से ऑस्ट्रिया निर्मित चार ग्लॉक पिस्टल (Glock Pistol) और आठ मैगजीन बरामद की गई थीं।
इस मामले में पुलिस ने राजस्थान के तीन फरार आरोपियों—राहुल रावत, भूपेंद्र सिंह रावत और एसके मीणा—पर भारी इनाम भी घोषित किया था। गोपालगंज के एसपी स्वर्ण प्रभात के मुताबिक, बिहार एसटीएफ (Bihar STF) और पुलिस की टीमें लगातार इनकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं।
जांच के दायरे में कई अनसुलझे सवाल
इन सभी घटनाओं ने एक संगठित आपराधिक नेटवर्क (Organised Crime Network) की ओर इशारा किया है। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या दूसरे राज्यों में वारदात करने वाले अपराधियों के लिए बिहार एक पनाहगाह (Safe Haven) बन चुका है? क्या हथियारों की आपूर्ति और वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) के लिए स्थानीय गिरोहों का इस्तेमाल किया जा रहा है? इन कड़ियों को जोड़ने के बाद ही इस पूरे नेटवर्क का असली सच सामने आ सकेगा।
