बिसौली से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने छोड़ी BJP, सपा में जाने की अटकलें

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उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) को रुहेलखंड और बदायूं क्षेत्र में एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। आंवला से पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के पार्टी छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद अब बदायूं जिले की बिसौली (सुरक्षित) सीट से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने भी भाजपा से किनारा कर लिया है। कुशाग्र ने 21 अक्टूबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से अपना इस्तीफा सौंप दिया।

‘यह पद नहीं, सम्मान और भरोसे के टूटने की पीड़ा है’

इस्तीफे का ऐलान करने के बाद कुशाग्र सागर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक लंबी और भावुक पोस्ट लिखकर अपनी व्यथा साझा की।

उन्होंने लिखा, “किसी भी संगठन में 11 वर्षों तक पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी से जुड़े रहना सिर्फ एक राजनीतिक जुड़ाव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक रिश्ता होता है। मैंने हर परिस्थिति में संगठन को परिवार मानकर अपना 100% दिया, लेकिन इतने वर्षों की कड़ी मेहनत के बदले वह अपेक्षित सम्मान और अपनापन नहीं मिला, जिसकी उम्मीद थी।” कुशाग्र ने स्पष्ट किया कि यह पीड़ा किसी पद या प्रतिष्ठा के न मिलने की नहीं है, बल्कि उस मान-सम्मान और भरोसे के टूटने की है, जिसे कोई भी इंसान वर्षों तक अपने दिल में संजोकर रखता है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी में अब तक मिले अवसरों के लिए आभार भी जताया।

कौन हैं कुशाग्र सागर?

कुशाग्र सागर बदायूं जिले की राजनीति का एक प्रमुख युवा चेहरा हैं और वे एक मजबूत सियासी परिवार से आते हैं। वे क्षेत्र के कद्दावर दलित नेता और पूर्व विधायक योगेंद्र सागर के बेटे हैं। कुशाग्र ने साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बिसौली (सुरक्षित) सीट से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर विधानसभा का सफर तय किया था। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वे बहुत ही मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे।

क्या समाजवादी पार्टी में होंगे शामिल?

रुहेलखंड इलाके में भाजपा के लिए यह इस्तीफा किसी बड़े झटके से कम नहीं है। हाल ही में आंवला के प्रभावशाली नेता धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा का दामन छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। अब कुशाग्र सागर के इस अचानक इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि वे भी जल्द ही साइकिल की सवारी कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो आगामी चुनावों से पहले बदायूं और आसपास के इलाकों के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।