कोलकाता भगदड़: बोबाजार इलाके में धारा 163 लागू, पूजा आयोजकों पर FIR दर्ज, 14 लोग हिरासत में

kolkata

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में मची दर्दनाक भगदड़ के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इस हादसे में 19 लोगों की मौत और 25 के घायल होने के बाद, पुलिस ने पंडाल आयोजकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। इसके साथ ही इलाके में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने बोबाजार इलाके के कुछ हिस्सों में 18 से 20 अक्टूबर तक निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

बोबाजार में BNSS की धारा 163 लागू

पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बोबाजार थाना क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है। इस निषेधाज्ञा के तहत तय इलाके में पांच या उससे अधिक लोगों के गैरकानूनी तरीके से एक जगह इकट्ठा होने पर सख्त रोक है। साथ ही, लाठी या किसी भी तरह के खतरनाक हथियार लेकर चलने और शांति भंग करने वाली सभी गतिविधियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है।

आयोजकों पर BNS की धाराओं में FIR, 14 हिरासत में

चोरबागान भगदड़ मामले में लापरवाही बरतने पर पुलिस ने पंडाल आयोजकों और अन्य संबंधित लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 110 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस सिलसिले में पुलिस ने 14 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे सघन पूछताछ शुरू कर दी है। जांच दल भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की पड़ताल कर रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार था। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों के आधार पर ही होगी।

बारिश और सीटी की आवाज बनी भगदड़ की वजह

पुलिस की अब तक की जानकारी के अनुसार, 17 अक्टूबर (शनिवार) की शाम तेज बारिश के दौरान यह हादसा हुआ। लोग बारिश से बचने के लिए तेजी से पंडाल में शरण लेने के लिए आगे बढ़े, जिससे अंदर भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। कुछ अधिकारियों ने यह भी बताया है कि अफरा-तफरी के इस माहौल में निजी सुरक्षा एजेंसी द्वारा की गई घोषणाओं और सीटी बजाने से लोगों में पैनिक और ज्यादा फैल गया, जिसने इस भयावह भगदड़ का रूप ले लिया।