UP Election 2027: राकेश प्रताप सिंह से अभय सिंह तक, बागी नेताओं के पाला बदलने से BJP को कितना फायदा?

UP Election 2027 से पहले सपा के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी BJP में शामिल

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा के तीन बागी विधायक BJP में शामिल हुए।

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के कई बागी विधायक भाजपा के पाले में पहुंच चुके हैं।  अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी भाजपा में शामिल हुए हैं, जबकि मनोज पांडेय और पूजा पाल इससे पहले ही पार्टी में आ चुके हैं। क्या इनके दल बदलने का असर इनकी अपनी सीटों के साथ दोनों पार्टियों की चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है? आइए जानते हैं।

ये विधायक कौन हैं और सपा से इनका रिश्ता कब बिगड़ा?

2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिनमें अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य और राकेश पांडेय शामिल थे। इस क्रॉस वोटिंग की वजह से भाजपा के आठों उम्मीदवार जीत गए और सपा अपने तीन में से सिर्फ दो उम्मीदवार जिता पाई। जून 2025 में सपा ने गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह, गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह और ऊंचाहार के विधायक मनोज कुमार पांडेय को पार्टी से बाहर कर दिया। पार्टी ने इन पर सांप्रदायिक और बांटने वाली सोच का समर्थन करने और पीडीए विरोधी विचारधारा रखने का आरोप लगाया था, जबकि सपा सूत्रों के मुताबिक बाकी विधायकों में से कुछ अपने निजी हितों के चलते सत्ताधारी दल के करीब थे।

भाजपा में इन नेताओं को क्या जिम्मेदारी मिली है?

जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार योगी सरकार ने प्रभारी मंत्रियों के जिलों में फेरबदल किया है, जिसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी के साथ वरिष्ठ मंत्री मनोज पांडेय को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं में सपा के बागी नेताओं मनोज पांडेय और पूजा पाल को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की बात सामने आई थी। अभय सिंह जनवरी 2025 में अयोध्या के मिल्कीपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु पासवान के पक्ष में प्रचार करते नजर आए थे, और 2024 की क्रॉस वोटिंग के बाद उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा भी मिली थी।

इन विधायकों के दल बदलने का चुनावी असर कहां दिख सकता है?

असर मुख्य तौर पर उन सीटों पर दिखने की संभावना है जहां इन नेताओं का अपना जनाधार है, यानी गोसाईगंज, गौरीगंज, ऊंचाहार, चायल और कालपी। भाजपा को फायदा तभी मिलेगा जब इन नेताओं के समर्थक पार्टी बदलने के बाद भी उनके साथ बने रहें, जबकि सपा का कहना रहा है कि ये नेता निजी कारणों से गए हैं। राकेश प्रताप सिंह ने निष्कासन के बाद कहा था कि उनके लिए राम, राष्ट्र और सनातन पहले हैं और पार्टी बाद में। इन सीटों पर असली तस्वीर टिकट बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही साफ होगी।

सपा ने इसके जवाब में क्या कदम उठाया है?

सपा ने 2027 की तैयारी तेज करते हुए अयोध्या सीट से पवन पांडेय को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इससे पहले लखनऊ में हुए ब्राह्मण सम्मेलन में अखिलेश यादव ने पवन पांडेय के अयोध्या से जीतने की बात कही थी, और इसे उसी सामाजिक वर्ग को साधने की कोशिश माना जा रहा है जिससे मनोज पांडेय समेत कई बागी नेता आते हैं। कांग्रेस से गठबंधन की बात भी चल रही है। पर आखिरी फैसला हाईकमान पर छोड़ा गया है।