मां कालरात्रि और सरस्वती प्रधान पूजा; जानें क्या है शुभ मुहूर्त, राहुकाल और संक्रांति का समय
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन (सप्तमी) है। आज मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। इसके साथ ही आज देवी सरस्वती की प्रधान पूजा भी की जाएगी। नई दिल्ली और NCR में इसके लिए विशेष शुभ मुहूर्त दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:50 बजे तक रहेगा।
सप्तमी तिथि अगले दिन (18 अक्टूबर) सुबह तक रहेगी, जिसके चलते पूजा की तारीख में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। इसके अलावा आज सूर्य तुला राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे आज तुला संक्रांति भी है।
सप्तमी दो दिन क्यों है और पूजा का क्या है तरीका?
पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 5:54 बजे शुरू होगी और 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे समाप्त होगी। यानी यह तिथि लगभग साढ़े 26 घंटे तक रहेगी और दो सूर्योदय को स्पर्श करेगी। इसी वजह से दोनों दिनों के पंचांग में सुबह सप्तमी लिखी मिलेगी, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है।
पूजा की तैयारी के लिए यह सही क्रम याद रखें:
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17 अक्टूबर (शनिवार): सप्तमी, कालरात्रि पूजा और सरस्वती प्रधान पूजा।
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18 अक्टूबर (रविवार): सुबह 8:27 तक सप्तमी, इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू।
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19 अक्टूबर (सोमवार): सूर्योदय पर अष्टमी, महागौरी पूजा और दुर्गाष्टमी पर्व।
ध्यान दें कि अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को जरूर शुरू हो रही है, लेकिन उदया तिथि के मान से दुर्गाष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।
आज सरस्वती पूजा का मुहूर्त क्या है?
नवरात्रि के दौरान सरस्वती पूजन में 16 अक्टूबर को आवाहन के बाद आज, 17 अक्टूबर को ‘प्रधान पूजा’ है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तहत इसका मुहूर्त दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:50 बजे तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 2 घंटे 18 मिनट है।
आज मूल नक्षत्र सुबह 9:47 बजे समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा शुरू होगा। यदि आप घर में नियमित रूप से सुबह सरस्वती वंदना करते हैं, तो उसे जारी रखें। लेकिन इस विशेष प्रधान पूजा को दोपहर के निर्धारित मुहूर्त में ही संपन्न करें।
मां कालरात्रि की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप श्याम वर्ण (काला) है और उनका वाहन गधा (गर्दभ) है। चार भुजाओं वाली देवी के दो हाथ अभय और वरदान की मुद्रा में होते हैं। धार्मिक परंपराओं में उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है, जो भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं।
नियमित पूजा में फूल अर्पित कर ‘ॐ देवी कालरात्र्यै नमः’ मंत्र का जप और आरती करें। ध्यान रहे, सरस्वती पूजा का दोपहर वाला मुहूर्त मां कालरात्रि की पूजा पर लागू नहीं होता, क्योंकि दोनों अलग-अलग अनुष्ठान हैं।
एक नजर में आज का पंचांग (17 अक्टूबर 2026)
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मास और पक्ष: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष
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तिथि: सप्तमी (18 अक्टूबर सुबह 8:27 तक)
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नक्षत्र: मूल (सुबह 9:47 तक), फिर पूर्वाषाढ़ा
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योग: अतिगण्ड (रात 11:03 तक), फिर सुकर्मा
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करण: गरज (शाम 7:11 तक), फिर वणिज
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: कन्या (शाम 7:57 तक), फिर तुला
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सूर्योदय-सूर्यास्त: सुबह 6:23 से शाम 5:50
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चंद्रोदय-चंद्रास्त: दोपहर 12:27 से रात 10:31
आज के शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 तक
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:43 से 5:33 तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:50 से 6:15 तक
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रवि योग: सुबह 6:23 से 9:47 तक
अशुभ समय (इस दौरान शुभ कार्य न करें):
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राहुकाल: सुबह 9:15 से 10:40 तक
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यमगण्ड: दोपहर 1:32 से 2:58 तक
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गुलिक काल: सुबह 6:23 से 7:49 तक
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दुष्टमुहूर्त: सुबह 6:23 से 7:09 और 7:09 से 7:54 तक
ध्यान दें: रवि योग के अंतिम हिस्से में राहुकाल भी पड़ रहा है। इसलिए केवल रवि योग का नाम देखकर किसी नए काम की शुरुआत न करें।
तुला संक्रांति का स्नान-दान कब करें? आज शाम 7:57 बजे सूर्य कन्या से तुला राशि में प्रवेश करेंगे।
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पुण्यकाल: दोपहर 12:06 से शाम 5:50 बजे तक।
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महापुण्यकाल: दोपहर 3:55 से शाम 5:50 बजे तक। स्नान और दान के लिए सूर्य के शाम वाले राशि प्रवेश तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है, इसे दिन के पुण्यकाल में ही किया जा सकता है।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारियों पर है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या पुरोहित से सलाह लें।)
