रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका लगा सकता है 100% टैरिफ, भारत को मिलेगी छूट?
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी देने वाले विधेयक पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले 10 दिनों में बड़ा फैसला ले सकते हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस नए प्रतिबंध कानून—’लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’—को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में बोलते हुए सर्जियो गोर ने बताया कि अमेरिकी सीनेट में इस विधेयक को भारी द्विदलीय समर्थन मिला था और 100 में से 86 सीनेटरों ने इसके पक्ष में वोट दिया। उन्होंने साफ किया कि इस कानून का मकसद किसी एक देश को निशाना बनाना या दंडित करना नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य जारी युद्ध को समाप्त कराना है।
ट्रम्प के पास फैसले के लिए बचे हैं 10 दिन
यह नया कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे रूसी ऊर्जा खरीदने वाले या मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करने वाले देशों पर भारी जुर्माना लगा सकें। कानून के प्रावधानों के मुताबिक, राष्ट्रपति को इसके पारित होने के 30 दिनों के भीतर अपनी कार्रवाई तय करनी होती है।
सर्जियो गोर ने कहा, “ट्रम्प को अगले 10 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा।” इस प्रस्तावित कानून का सीधा असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन प्रमुख हैं।
भारत को छूट मिलेगी या नहीं?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधन (तेल और गैस) खरीदता है, इसलिए वह स्वाभाविक रूप से इस कानून की जद में आ सकता है। सर्जियो गोर ने कहा, “हमारा लक्ष्य किसी भी सहयोगी या देश को सजा देना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य इस युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाना है।”
जब गोर से पूछा गया कि क्या भारत को इन प्रतिबंधों और टैरिफ से छूट मिलेगी, तो उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से राष्ट्रपति ट्रम्प के विवेक पर निर्भर करेगा। उन्होंने बताया कि अमेरिका इस बात को समझता है कि कोई भी देश अचानक अपनी ऊर्जा आपूर्ति नहीं रोक सकता, लेकिन अमेरिका का अंतिम मकसद युद्ध के लिए जाने वाले धन के प्रवाह को धीरे-धीरे खत्म करना है। इस मुद्दे पर दोनों देशों (भारत-अमेरिका) के बीच लगातार बातचीत चल रही है।
व्यापार समझौते पर तेजी से हो रहा काम
प्रतिबंधों की चिंताओं के बीच, अमेरिकी राजदूत ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सकारात्मक अपडेट दिया। उन्होंने बताया कि व्यापार समझौते को लेकर बातचीत बेहद सकारात्मक दिशा में है। मुख्य ढांचा और बड़े मुद्दे सुलझाए जा चुके हैं, अब केवल अंतिम बारीकियों पर काम बाकी है।
गोर ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले डेढ़ साल से चल रही यह बातचीत अन्य संधियों के मुकाबले काफी तेज गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका रक्षा, चिप निर्माण (Semiconductors), डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच मजबूत भागीदारी चाहता है। भारत तकनीकी विकास के लिए मुफीद जगह है और शीर्ष अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर काम करना दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा।
