6 राज्यों के राज्यपालों का फेरबदल, मोदी सरकार की रणनीति और BJP के अगले कदम
12 अक्टूबर की देर शाम राष्ट्रपति भवन से जारी एक आदेश ने 6 राज्यों—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तराखंड, सिक्किम और ओडिशा—के राजभवनों की तस्वीर बदल दी। इसमें दो मौजूदा राज्यपालों का तबादला किया गया और चार नए राज्यपाल नियुक्त किए गए। हालांकि, इसे एक नियमित प्रशासनिक बदलाव माना जा सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में राजभवनों के हर फेरबदल को तीन कसौटियों पर परखा जाता है: कौन चुना गया, कहां भेजा गया और अभी क्यों भेजा गया?
यह फेरबदल सिर्फ केंद्र-राज्य संबंधों का संकेत नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक ढांचे में हो रहे सबसे व्यापक पुनर्गठन और 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति को भी स्पष्ट करता है।
नौकरशाह नहीं, BJP के भरोसेमंद नेताओं पर दांव
इस बार मोदी सरकार ने अपनी पुरानी नीति को बदलते हुए, रिटायर्ड नौकरशाहों, न्यायाधीशों और सैन्य अधिकारियों के बजाय BJP संगठन के वफादार और पुराने नेताओं को राजभवन भेजा है।
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ओम प्रकाश माथुर: पीएम मोदी के पुराने सहयोगी और RSS प्रचारक ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम से हटाकर केरल का राज्यपाल बनाया गया है।
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सुधा यादव: BJP संसदीय बोर्ड की सदस्य रहीं सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
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ढाल सिंह बिसेन: मध्य प्रदेश से पूर्व सांसद ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड भेजा गया है।
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दुष्यंत गौतम: संगठन से हाल ही में हटाए गए दलित नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम की जिम्मेदारी दी गई है।
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राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर: आर्लेकर को तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बना दिया गया है।
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ब्रज मोहन राम: तीन बार सांसद रहे ब्रज मोहन राम को ओडिशा राजभवन भेजा गया है।
BJP संगठन में बदलाव: संसदीय बोर्ड में कौन आएगा?
इस फेरबदल का सबसे बड़ा संदेश BJP संसदीय बोर्ड से जुड़ा है। सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल बनाए जाने से BJP के 11 सदस्यीय संसदीय बोर्ड और 15 सदस्यीय केंद्रीय चुनाव समिति में एक अहम जगह खाली हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही संसदीय बोर्ड का पुनर्गठन हो सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को जगह मिल सकती है। इसके अलावा, 2027 के पंजाब चुनाव को देखते हुए बोर्ड में एक प्रमुख सिख चेहरे को भी शामिल किया जा सकता है।
विपक्ष शासित राज्यों में नई चुनौतियां
जिन तीन विपक्ष शासित राज्यों (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक) में राज्यपाल भेजे गए हैं, वहां राजभवन और राज्य सरकार के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं:
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केरल: यहां वाम दलों की सरकार की जगह अब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार है। ओम प्रकाश माथुर के सामने एक नई सरकार और नए सिरे से तालमेल बिठाने की चुनौती होगी।
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तमिलनाडु: यहां विधेयकों को मंजूरी देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला जा चुका है। आर्लेकर को अब नई TVK सरकार के साथ कानूनी और संवैधानिक दायरे में काम करना होगा।
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कर्नाटक: डी.के. शिवकुमार सरकार और राजभवन के बीच मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी को लेकर विवाद चल रहा है। सुधा यादव का सामना सीधे तौर पर इसी विवाद से होगा।
क्या आनंदीबेन पटेल बनी रहेंगी UP की राज्यपाल?
इस पूरे फेरबदल में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात ने खींचा कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का तबादला नहीं हुआ है। उनका 5 साल का कार्यकाल जुलाई 2024 में ही पूरा हो चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव तक पीएम मोदी उन्हें लखनऊ में ही बनाए रखना चाहते हैं।
कुल मिलाकर, 12 अक्टूबर का यह फेरबदल मोदी सरकार की उस नई नीति का प्रतीक है, जहां ‘प्रोफेशनल्स’ के बजाय प्रधानमंत्री अपने उन भरोसेमंद राजनीतिक साथियों को अहम संवैधानिक पदों पर बिठा रहे हैं, जो पार्टी की विचारधारा और चुनावी रणनीतियों के साथ पूरी तरह तालमेल रखते हैं।
