चुनाव आयोग को नोटिस, राहुल गांधी को कोर्ट की फटकार, जानें सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में गुरुवार को दो अहम मामलों पर सुनवाई हुई, जिसने सियासी और कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पहला मामला चुनाव आयोग (ECI) की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन और राहुल गांधी के आचरण को लेकर था। अदालत ने जहां एक तरफ चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनके 12 अक्टूबर के ‘मार्च’ वाले आचरण पर कड़ी फटकार भी लगाई।
चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार को नोटिस
मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने राहुल गांधी सहित 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है।
इस याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि 24 जून 2025 को देशभर में SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े दस्तावेज, चुनाव आयुक्तों की फाइलें, बैठकों के मिनट्स, आधिकारिक नोटिंग, आपत्तियां और ECINET व ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग सार्वजनिक किए जाएं ताकि निर्णय लेने के आधार स्पष्ट हो सकें।
दिल्ली में पाबंदियों और विरोध-प्रदर्शन पर सुनवाई
इसी के साथ, 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस दौरान वकीलों को हिरासत में लिया गया, विपक्षी नेताओं को नजरबंद किया गया और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई। इसके अलावा मेट्रो, रेलवे और इंटरनेट सेवाओं में कथित व्यवधान का मुद्दा भी उठाया गया।
‘हमें कोई डरा-धमका नहीं सकता’: CJI की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के बाहर हुए हंगामे और नारेबाजी का मुद्दा भी गूंजा। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट को बताया कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट आने के दौरान हुए हंगामे से वकील परेशान हैं। उन्होंने कहा कि करीब 200 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कोर्ट को डराने-धमकाने की कोशिश की गई है।
इस पर सीजेआई ने सख्त रुख अपनाते हुए गौरव भाटिया को आश्वस्त किया। CJI ने दो टूक शब्दों में कहा, “निश्चिंत रहें, कोई हमें धमका नहीं सकता। लोग बाहर कुछ भी कहते हों, लेकिन कोर्ट के अंदर आते ही उनकी भाषा बदल जाती है।”
