UP Elections 2027: पीएम मोदी के गढ़ वाराणसी में क्या है चुनावी गणित? समझें जिले की सभी 8 विधानसभा सीटों का सियासी समीकरण

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उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव (UP Elections 2027) के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी जमीनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस सियासी बिसात में वाराणसी जिले का महत्व सबसे खास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से लगातार तीन बार से वाराणसी लोकसभा सीट से सांसद हैं, जिसके चलते यह जिला भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय राजनीति और काशी की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिले की आठ विधानसभा सीटों के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजरें टिक गई हैं।

वाराणसी का भौगोलिक और जनसांख्यिकीय खाका

वाराणसी जिले की सीमाएं पांच जिलों (जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर और भदोही) से लगती हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की कुल आबादी करीब 36.76 लाख थी, जिसमें 52.3 प्रतिशत पुरुष और 47.7 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। जिले की साक्षरता दर लगभग 75.60 प्रतिशत है।

धार्मिक समीकरण के लिहाज से वाराणसी में मुख्य मुकाबला हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के इर्द-गिर्द रहता है। यहां करीब 84.5 प्रतिशत हिंदू और 14.9 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। कुल आबादी का 56.6 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है और अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब 13.2 प्रतिशत है।

तीन चुनावों में कैसे बदला वाराणसी का मिजाज?

जिले में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 6 सीटें (रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट, सेवापुरी, पिंडरा) वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में आती हैं, जबकि 2 सीटें (अजगरा और शिवपुर) चंदौली लोकसभा का हिस्सा हैं।

पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे जिले में भाजपा के मजबूत होते दबदबे की कहानी कहते हैं:

  • 2012: राजनीतिक जनादेश बिखरा हुआ था। भाजपा ने 3, बसपा ने 2 और सपा, अपना दल व कांग्रेस ने 1-1 सीट जीती थी।

  • 2017: भाजपा ने बड़ी छलांग लगाते हुए 6 सीटों पर कब्जा किया। अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) को 1-1 सीट मिली, जबकि सपा, बसपा और कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका।

  • 2022: भाजपा ने अपना प्रदर्शन और बेहतर किया तथा 8 में से 7 सीटें जीत लीं। अपना दल ने 1 सीट बरकरार रखी।

ग्रामीण सीटों का सियासी गणित: पिंडरा, अजगरा, शिवपुर, रोहनिया और सेवापुरी

वाराणसी की ग्रामीण सीटों पर जातीय समीकरण हार-जीत तय करते हैं:

  • पिंडरा (384): 98.2 प्रतिशत ग्रामीण आबादी वाली इस सीट पर 2022 में भाजपा के अवधेश कुमार सिंह ने 84,325 वोट (38.23%) हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने बसपा और कांग्रेस उम्मीदवारों को बड़े अंतर से हराया।

  • अजगरा – SC (385): इस आरक्षित सीट पर दलित (21%) और मुस्लिम (10%) मतदाताओं का खासा प्रभाव है। 2022 में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां भाजपा के त्रिभुवन राम (41.25%) ने SBSP के सुनील सोनकर (37.51%) को मामूली अंतर से मात दी।

  • शिवपुर (386): 2022 में इस सीट पर राजभर मतदाताओं का प्रभाव स्पष्ट दिखा। भाजपा के अनिल राजभर (45.76%) ने SBSP के अरविंद राजभर (34.77%) को 27,687 वोटों के अंतर से हराया।

  • रोहनिया (387): पटेल और ग्रामीण मतदाताओं के प्रभाव वाली इस सीट पर 2022 में अपना दल (सोनेलाल) के डॉ. सुनील पटेल (48.08%) ने अपना दल (कमेरावादी) के अभय पटेल को 46,472 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी।

  • सेवापुरी (391): 90 प्रतिशत ग्रामीण आबादी वाले इस क्षेत्र में भाजपा के नील रतन सिंह ने 1,05,163 वोट हासिल कर समाजवादी पार्टी के सुरेंद्र सिंह पटेल को लगभग 22 हजार वोटों से हराया।

शहरी राजनीति का केंद्र: वाराणसी उत्तर, दक्षिण और कैंट

वाराणसी शहर के विस्तार के साथ इसे तीन विधानसभा क्षेत्रों में बांटा गया है, जहां 95 प्रतिशत से अधिक आबादी शहरी है। 2022 के चुनाव में इन तीनों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की, लेकिन जीत का मार्जिन अलग-अलग रहा:

  • वाराणसी उत्तर: इस सीट पर मुस्लिम और SC आबादी का अच्छा प्रभाव है। 2022 में भाजपा के रविंद्र जायसवाल ने 1,34,471 (54.61%) वोट हासिल कर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को करीब 40 हजार वोटों से हराया।

  • वाराणसी दक्षिण: पुरानी काशी और घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में मुकाबला सबसे कड़ा रहा। भाजपा के डॉ. नीलकंठ तिवारी ने 99,622 वोट (50.88%) हासिल किए, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 88,900 वोट (45.41%) मिले। जीत का अंतर महज 10,722 वोटों का था।

  • वाराणसी कैंट: यह भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ साबित हुआ। 2022 में भाजपा के सौरभ श्रीवास्तव ने 1,47,833 वोट (60.63%) पाकर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 86,844 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी।