गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में क्या फिर पलटेगा पासा? समझें सभी 4 विधानसभा सीटों का सियासी गणित

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अमेठी का नाम सिर्फ एक जिले के तौर पर नहीं, बल्कि दशकों से राष्ट्रीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में लिया जाता है। कांग्रेस के लंबे राजनीतिक प्रभाव, गांधी परिवार से जुड़े चुनावी इतिहास और बाद के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बढ़ते दखल ने अमेठी को उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा चर्चा के केंद्र में रखा है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Elections 2027) के मद्देनजर इस वीआईपी जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

अमेठी जिले की 4 विधानसभा सीटें वर्तमान प्रशासनिक ढांचे के अनुसार अमेठी जिले में कुल चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं:

  1. 178 – तिलोई

  2. 184 – जगदीशपुर (सुरक्षित)

  3. 185 – गौरीगंज

  4. 186 – अमेठी

जिला प्रशासन की आधिकारिक सूची में भी इन्हीं चार सीटों को अमेठी जिले की प्रमुख विधानसभा सीटों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

प्रशासनिक इतिहास और जनसांख्यिकीय आंकड़े

अमेठी उत्तर प्रदेश का 72वां जिला है, जिसका गठन 1 जुलाई 2010 को तत्कालीन सुल्तानपुर जिले की तीन तहसीलों (अमेठी, गौरीगंज, मुसाफिरखाना) और रायबरेली जिले की तिलोई तहसील को मिलाकर किया गया था।

2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर देखें तो वर्तमान अमेठी जिले में शामिल इन चारों तहसीलों की कुल आबादी लगभग 20.50 लाख (या प्रशासनिक पोर्टल के अनुसार 18.67 लाख) दर्ज की गई थी। जिले का लिंगानुपात करीब 976 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष है। धार्मिक आंकड़ों के अनुसार यहां हिंदू आबादी लगभग 79.26 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 20.06 प्रतिशत है, जबकि कुल साक्षरता दर लगभग 59.14 प्रतिशत है।

चारों सीटों का राजनीतिक इतिहास और 2022 के नतीजे

अमेठी जिले की इन चारों सीटों पर अलग-अलग दलों का प्रभाव रहा है:

  • तिलोई (सामान्य): यह एक महत्वपूर्ण सामान्य सीट है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मयंकेश्वर शरण सिंह ने 99,472 वोट हासिल कर सपा के मोहम्मद नईम को 27,829 मतों से हराया था। मयंकेश्वर शरण सिंह यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं।

  • जगदीशपुर (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित): इस आरक्षित सीट पर पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा है, लेकिन 2017 और 2022 के चुनावों में भाजपा के सुरेश कुमार ने जीत दर्ज की। 2022 में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को 22,824 वोटों के अंतर से हराया था।

  • गौरीगंज (सामान्य): यह सीट हमेशा से कड़े मुकाबलों के लिए जानी जाती है। 2022 में समाजवादी पार्टी के राकेश प्रताप सिंह ने यहां से जीत दर्ज की और भाजपा के चंद्रप्रकाश मिश्रा मटियारी को मात दी। राकेश प्रताप सिंह इससे पहले 2012 और 2017 में भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं।

  • अमेठी (सामान्य): जिले के नाम वाली इस प्रमुख सीट पर 2022 के चुनाव में सपा की महाराजी प्रजापति ने भाजपा के संजय सिंह को 18,096 वोटों के अंतर से हराया था। वहीं, 2017 में यह सीट भाजपा की गरिमा सिंह के खाते में गई थी।

2027 के चुनाव के लिहाज से क्या हैं मायने?

साल 2022 के विधानसभा चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो अमेठी जिले की चार सीटों का मुकाबला दो-दो की बराबरी पर बंटा रहा था—जहां तिलोई और जगदीशपुर पर भाजपा ने कब्जा जमाया, वहीं गौरीगंज और अमेठी में समाजवादी पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ साबित की।

आगामी 2027 के चुनावी रण में जहां भाजपा अपने प्रभाव को और विस्तार देने की कोशिश करेगी, वहीं सपा और अन्य दल इस पारंपरिक राजनीतिक जमीन पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार कर रहे हैं। अमेठी की इन चार सीटों के चुनावी समीकरण यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के साथ इस वीआईपी जिले में जनता का अगला रुझान किस ओर रहता है।