अलीगढ़ में क्या फिर खिलेगा कमल या बदलेगा समीकरण? समझें सभी 7 सीटों का सियासी गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Elections 2027) को लेकर राज्य के सभी राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी कमर कस ली है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलीगढ़ जिले की अपनी एक खास और रणनीतिक अहमियत है। ‘तालानगरी’ के रूप में मशहूर और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की वजह से राष्ट्रीय पहचान रखने वाला यह जिला सिर्फ शहरी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी ग्रामीण और कस्बाई विधानसभा सीटें भी पश्चिमी यूपी के पूरे चुनावी मूड को प्रभावित करती हैं।
7 विधानसभा सीटों का राजनीतिक गणित
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था और विधानसभा परिसीमन के अनुसार अलीगढ़ जिले के अंतर्गत कुल 7 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें खैर, बरौली, अतरौली, छर्रा, कोल, अलीगढ़ और इगलास शामिल हैं। जिला निर्वाचन आंकड़ों के मुताबिक ये सीटें 71 से 77 क्रम संख्या के तहत आती हैं।
इनमें से खैर, बरौली, अतरौली, छर्रा और कोल सीटें अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि अलीगढ़ सदर और इगलास विधानसभा सीटें अन्य संसदीय क्षेत्रों के अंतर्गत आती हैं। यही वजह है कि यहां का चुनावी मुकाबला स्थानीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रभाव भी रखता है।
जनसांख्यिकी और सामाजिक समीकरण
2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार अलीगढ़ की कुल आबादी करीब 36.73 लाख थी, जिसमें लगभग 66.87 प्रतिशत ग्रामीण और 33.13 प्रतिशत शहरी आबादी शामिल थी। जिले में साक्षरता दर करीब 69.61 प्रतिशत दर्ज की गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अलीगढ़ में जाट, ठाकुर, ब्राह्मण, दलित, पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतदाताओं का मिलाजुला प्रभाव है, जो हर चुनाव में हार-जीत के समीकरण तय करता है।
भाजपा का दबदबा और पिछला चुनावी इतिहास
अलीगढ़ के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो पिछले दो विधानसभा चुनावों में यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पूरी तरह से दबदबा रहा है।
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2017 का चुनाव: बीजेपी ने जिले की सातों विधानसभा सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
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2022 का चुनाव: बीजेपी ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी सातों सीटों पर कब्जा जमाया। हालांकि, कुछ सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा था। उदाहरण के लिए, कोल सीट पर बीजेपी के अनिल पाराशर ने सपा के शाज इशाक को केवल 5,028 वोटों के करीबी अंतर से हराया था। वहीं अलीगढ़ सदर सीट से मुक्ता राजा ने जीत हासिल की थी।
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इसके विपरीत, 2012 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह अलग थी, जब समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने कई सीटों पर जीत दर्ज की थी और बीजेपी का प्रदर्शन सीमित रहा था।
खैर उपचुनाव और अतरौली की विरासत
हालिया राजनीतिक गतिविधियों की बात करें तो खैर विधानसभा सीट (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) पर 2024 में हुए उपचुनाव में बीजेपी के सुरेंद्र दिलेर ने सपा की चारू कैन को 38,393 वोटों से हराकर सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा था।
इसके अलावा, अतरौली विधानसभा सीट का विशेष राजनीतिक महत्व है क्योंकि यह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता स्व. कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत से जुड़ी रही है। 1974 में कल्याण सिंह ने यहीं से जीत दर्ज की थी, और आज भी यह सीट बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में गिनी जाती है, जहां से वर्तमान में संदीप कुमार सिंह विधायक हैं।
2027 के चुनाव में किन मुद्दों पर होगी नजर?
आगामी 2027 के रण में जहां बीजेपी अपने विजय रथ को बरकरार रखने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी दल खासतौर से समाजवादी पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन यहां सेंध लगाने के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार कर रहे हैं। बेरोजगारी, विकास, कानून-व्यवस्था, स्थानीय मुद्दे और जातियों का नफा-नुकसान तय करेगा कि अलीगढ़ की सात सीटों पर इस बार जनता का मूड किस ओर जाता है।
