दिवाली से पहले मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें तेज, किन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी?

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल फेरबदल (Cabinet Reshuffle) की अटकलें एक बार फिर जोर पकड़ने लगी हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे और तमिलनाडु में पार्टी संगठन को मजबूत करने की उनकी इच्छा ने इन चर्चाओं को नया आधार दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दिवाली से पहले मंत्रिपरिषद में बदलाव हो सकता है, जिसमें आधा दर्जन या उससे ज्यादा पदों पर नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं या मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं।

हालांकि, इस फेरबदल को लेकर सरकार या पीएमओ की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए की गई बैठकों ने इस संभावित फेरबदल को प्रशासनिक प्रदर्शन और राजनीतिक जरूरत से जोड़ दिया है।

एल. मुरुगन के इस्तीफे के क्या मायने हैं?

केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने तमिलनाडु लौटकर बीजेपी संगठन के लिए काम करने की इच्छा जाहिर की है। उनका यह फैसला ऐसे समय आया है जब बीजेपी दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। तमिलनाडु में पार्टी को अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने के साथ-साथ मजबूत क्षेत्रीय दलों की चुनौती का भी सामना करना है।

मुरुगन को संगठन की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना को पार्टी की इसी व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके इस कदम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मोदी सरकार अब मंत्रियों की जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव करने की तैयारी में है। हालांकि, केवल एक इस्तीफे से बड़े बदलाव की पुष्टि नहीं होती, लेकिन यह एक संकेत जरूर माना जा रहा है।

किन चेहरों की हो सकती है छुट्टी?

मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा काफी समय से चल रही है। कुछ राजनीतिक और सांगठनिक घटनाक्रम इस चर्चा को हवा दे रहे हैं:

  • राज्यसभा कार्यकाल समाप्त: रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन जैसे नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया है, जिससे मंत्रिपरिषद में जगह बनी है।

  • राज्यसभा नामांकन नहीं: हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को बीजेपी ने राज्यसभा के लिए दोबारा नामांकित नहीं किया है। इनके मंत्री पद पर बने रहने या हटने से नए चेहरों के लिए अवसर बन सकते हैं।

  • संगठनात्मक बदलाव: हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की कमान सौंपी गई है। ऐसे में उनकी केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका को लेकर अटकलें हैं। हालांकि, संगठनात्मक पद मिलने का सीधा अर्थ मंत्री पद से हटना नहीं है, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

आगामी विधानसभा चुनाव और राजनीतिक संतुलन

अगर यह फेरबदल होता है, तो इसका एक बड़ा उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी और राजनीतिक संतुलन साधना होगा। यूपी, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों के चुनाव बीजेपी के लिए अहम हैं:

  • उत्तर प्रदेश: लोकसभा चुनावों के बाद यूपी बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से अहम बना हुआ है। राज्य से नए चेहरों को शामिल करने या मौजूदा प्रतिनिधित्व में बदलाव कर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विचार हो सकता है।

  • उत्तराखंड: यहां पार्टी अपने राजनीतिक आधार को मजबूत बनाए रखने के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व बढ़ा सकती है या किसी नेता की भूमिका बदल सकती है।

  • पंजाब: सिख नेतृत्व को केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने की संभावनाओं पर भी नजर है।

इसके अलावा, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाने की रणनीति के तहत, ईसाई समुदाय से आने वाले किसी नेता को भी कैबिनेट में जगह मिलने की चर्चा है।

क्या विभागों में भी होगा बदलाव?

संभावित फेरबदल में केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव हो सकता है। कुछ मंत्रियों के पास वर्तमान में एक से अधिक मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री उनके कार्यभार को कम कर सकते हैं या मंत्रालयों का अधिक प्रभावी वितरण कर सकते हैं। हालांकि, एक से ज्यादा मंत्रालय संभालना किसी मंत्री के खराब प्रदर्शन का संकेत नहीं माना जाता।

संवैधानिक सीमा और नए मंत्रियों की गुंजाइश

संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या (प्रधानमंत्री सहित) लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 543 निर्वाचित सीटों के आधार पर यह अधिकतम संख्या 81 मंत्रियों की हो सकती है।

नए नेताओं को शामिल करने की गुंजाइश इस बात पर निर्भर करेगी कि वर्तमान में कितने मंत्री हैं और कितने पद खाली होते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें दिवाली और आगामी शीतकालीन सत्र पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस दौरान कैबिनेट में कोई बड़ा बदलाव करती है या नहीं।