अयोध्या की 5 विधानसभा सीटों का पूरा समीकरण, 2022 से अब तक कितना बदला सियासी मिजाज
अयोध्या जिला उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का भी सबसे अहम केंद्र बना हुआ है। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दलों की सक्रियता तेज हो गई है। 2022 के विधानसभा चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के मिल्कीपुर उपचुनाव के बाद यहां के सियासी समीकरणों में कई बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं।
जिले की पांच सीटें: 2022 में भाजपा को 3 और सपा को मिली थीं 2 सीटें
अयोध्या जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं—अयोध्या (सदर), मिल्कीपुर, बीकापुर, रुदौली और गोसाईगंज। इनमें से मिल्कीपुर सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, जबकि बाकी चार सीटें सामान्य श्रेणी में हैं। रुदौली, मिल्कीपुर, बीकापुर और अयोध्या सदर सीटें फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में आती हैं, जबकि गोसाईगंज सीट प्रशासनिक तौर पर मोहनलालगंज तहसील से जुड़ी है।
2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की पांच में से तीन सीटों पर भाजपा और दो पर सपा ने जीत दर्ज की थी:
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अयोध्या (सदर): भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता ने सपा के तेज नारायण पांडेय को करीब 20 हजार वोटों से शिकस्त दी थी। यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है।
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रुदौली: भाजपा के रामचंद्र यादव ने सपा प्रत्याशी आनंद सेन को लगभग 40 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया।
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बीकापुर: भाजपा के अमित सिंह चौहान ने कड़े मुकाबले में सपा के फिरोज खान को करीब 5,500 वोटों के अंतर से हराया था।
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गोसाईगंज: सपा के अभय सिंह ने भाजपा की आरती तिवारी को लगभग 13 हजार वोटों से पराजित किया। यह सीट स्थानीय स्तर पर राजनीतिक परिवारों के वर्चस्व के लिए जानी जाती है।
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मिल्कीपुर (सुरक्षित): सपा के वरिष्ठ नेता अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की थी और भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा था।
2024 की लोकसभा हार और 2025 के उपचुनाव का बड़ा मोड़
जिले की राजनीति में सबसे बड़ा फेरबदल 2024 के लोकसभा चुनाव में दिखा, जब सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने फैजाबाद संसदीय सीट पर भाजपा को हराकर देशभर का ध्यान खींचा। सांसद बनने के बाद अवधेश प्रसाद ने मिल्कीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद फरवरी 2025 में हुए मिल्कीपुर उपचुनाव ने सियासी तस्वीर को एक बार फिर बदला। सपा ने अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को मैदान में उतारा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु पासवान ने 61,710 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल कर यह सीट सपा से छीन ली। इस नतीजे के बाद जिले में भाजपा और सपा के बीच का मुकाबला और अधिक सीधा हो गया है।
जातीय समीकरण: किस सीट पर कौन सा वर्ग तय करता है दिशा?
जिले की पांचों सीटों पर जातीय गोलबंदी उम्मीदवारों की जीत-हार में अहम भूमिका निभाती है:
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अयोध्या (सदर): यहां सामान्य वर्ग और वैश्य मतदाताओं की तादाद ज्यादा है। इसके अलावा ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाता भी परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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मिल्कीपुर (सुरक्षित): पासी और अन्य अनुसूचित जाति समुदाय के मतदाता यहां सबसे बड़ा समूह हैं। यादव और मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित करता है।
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बीकापुर: इस सीट पर ठाकुर, ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं के बीच का संतुलन चुनावी नतीजे की दिशा तय करता है।
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रुदौली: मुस्लिम मतदाताओं की मजबूत उपस्थिति के साथ यादव और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का मिलाजुला प्रभाव यहां मुख्य कारक रहता है।
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गोसाईगंज: क्षत्रिय और ओबीसी मतदाताओं के साथ-साथ निषाद और दलित मतदाताओं की संख्या यहां परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
डेमोग्राफी और सामाजिक ताना-बाना
2018 में योगी सरकार द्वारा फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया गया था। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक:
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जिले की कुल आबादी करीब 24 लाख 71 हजार दर्ज की गई थी, जिसमें पुरुषों की संख्या लगभग 12.60 लाख और महिलाओं की संख्या 12.11 लाख थी।
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यहां लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 962 महिलाओं का है, जो प्रदेश के औसत से बेहतर स्थिति दर्शाता है।
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साक्षरता दर करीब 69 प्रतिशत है (पुरुष साक्षरता लगभग 78% और महिला साक्षरता करीब 59%)।
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धार्मिक आधार पर जिले में करीब 85 प्रतिशत आबादी हिंदू और लगभग 15 प्रतिशत मुस्लिम है।
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जिले में अनुसूचित जाति की आबादी का हिस्सा करीब 22 से 23 प्रतिशत है, जो मिल्कीपुर के अलावा अन्य सामान्य सीटों पर भी राजनीतिक समीकरणों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
1991 के दौर में मंदिर आंदोलन के सहारे मजबूत हुई भाजपा और उसके बाद सामाजिक न्याय की राजनीति के जरिए आधार बनाने वाली सपा और बसपा, तीनों ही दल अब 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर अपने बूथ स्तर के संगठनों को पुनर्गठित करने में जुटे हैं।
