सुप्रीम कोर्ट पहुंची राहुल गांधी की लीगल टीम: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 8 नेताओं ने दाखिल की याचिका

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वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया (SIR) में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी ‘INDIA’ (इंडिया) गठबंधन का आंदोलन अब देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। सोमवार को राजधानी में भारी सुरक्षा घेरे और विरोध मार्च के बीच राहुल गांधी की लीगल टीम सुप्रीम कोर्ट के फाइलिंग काउंटर पर पहुंची और औपचारिक याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की।

सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी समेत 8 नेताओं की संयुक्त याचिका

विपक्षी दलों के ‘सुप्रीम कोर्ट मार्च’ के बाद कानूनी मोर्चे पर कदम बढ़ाते हुए राहुल गांधी समेत 8 प्रमुख विपक्षी नेताओं की ओर से यह याचिका दाखिल की जा रही है।

याचिका में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में हुई कथित अनियमिमताओं, ‘फॉर्म-6’ से जुड़े विवादों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। वकीलों की टीम ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में दस्तावेज दाखिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी है ताकि मामले पर त्वरित सुनवाई की मांग की जा सके।

‘विपक्ष देश को बदनाम कर रहा है’: अनुराग ठाकुर का पलटवार

विपक्ष के इस मार्च और सुप्रीम कोर्ट जाने के कदम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार ने तीखा पलटवार किया है।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपनी चुनावी असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगा रहे हैं और इसके जरिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के वकीलों का अनोखा विरोध, पढ़ी संविधान की प्रस्तावना

राजधानी दिल्ली में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती, कई मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और वकीलों व प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कानूनी बिरादरी में भी रोष देखा गया।

दिल्ली हाईकोर्ट के वकीलों ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में एकजुट होकर भारत के संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का सामूहिक पाठ किया। वकीलों का कहना था कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध और अदालत तक नागरिकों की आवाजाही को रोकना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।

दिनभर छावनी बनी रही राजधानी

गौरतलब है कि विपक्ष के इस प्रस्तावित मार्च को देखते हुए सोमवार सुबह से ही मध्य दिल्ली और सुप्रीम कोर्ट के आसपास सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। 30 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती के बीच विपक्ष ने अपनी रणनीति बदलते हुए कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का फैसला किया।