खान मार्केट से लेकर चांदनी चौक तक बाजार बंद; एक दिन में 2000 करोड़ के नुकसान की आशंका
राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 10 अक्टूबर को किए गए विरोध प्रदर्शन ने शहर के बड़े व्यापारिक केंद्रों की रफ्तार थाम दी है। सुरक्षा, ट्रैफिक प्रतिबंधों और संभावित नुकसान की आशंकाओं के चलते सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, कनाट प्लेस, करोल बाग और लाजपत राय मार्केट समेत कई प्रमुख बाजारों को बंद रखना पड़ रहा है।
दिल्ली के पॉश खान मार्केट के ट्रेडर्स ने भी एहतियात के तौर पर अपनी दुकानें बंद रखने का फैसला किया है। व्यापारियों के संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने आशंका जताई है कि शहर भर में इन प्रदर्शनों के कारण एक ही दिन में करीब 2000 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ है।
खान मार्केट: एक दिन में हर दुकान को 1.5 लाख का नुकसान
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने बताया कि जब प्रदर्शनकारी कमर्शियल इलाकों के पास पहुंचते हैं, तो दुकानों और संपत्तियों को नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है। इसी डर से व्यापारियों ने स्वेच्छा से बाजार बंद रखने का फैसला किया।
मेहरा के मुताबिक, खान मार्केट, साउथ एक्सटेंशन और कनाट प्लेस जैसे प्रीमियम इलाकों में दुकानें बंद रहने के बावजूद व्यापारियों को किराया और कर्मचारियों का वेतन देना ही पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक, एक दिन की बंदी से हर दुकान को 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। ऐसे में अगर प्रदर्शन लंबा खिंचता है, तो फल, किराने और जल्दी खराब होने वाले (Perishable) उत्पादों के व्यापारियों को सबसे बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।
CTI की अपील: ‘दिवाली तक प्रदर्शन न करें राजनीतिक दल’
व्यापारियों और उद्यमियों के बड़े संगठन CTI ने इस बंदी से होने वाले भारी नुकसान को लेकर गहरी चिंता जताई है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि संगठन ने CJP नेता अभिजीत दीपके समेत तमाम राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखकर अपील की है कि त्योहारी सीजन को देखते हुए दिवाली तक राजधानी में कोई भी धरना-प्रदर्शन आयोजित न किया जाए।
संगठन का कहना है कि दिल्ली में 20 लाख से अधिक व्यापारियों के लिए त्योहारी सीजन (Festive Season) साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। अगर विरोध-प्रदर्शनों के चलते सड़कें जाम रहीं और ट्रैफिक की समस्या बनी रही, तो बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही ठप हो जाएगी, जिससे दिल्ली की अर्थव्यवस्था और छोटे-बड़े व्यापारियों की रोजी-रोटी पर गंभीर असर पड़ेगा।
रामलीला आयोजनों और रोजगार पर भी लटकी तलवार
CTI ने इस बात पर भी जोर दिया है कि दिल्ली में रामलीलाओं का दौर शुरू हो गया है। राजधानी में करीब 650 रामलीलाएं आयोजित की जाती हैं, जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मुहैया कराती हैं। संगठन ने आशंका जताई है कि यदि प्रदर्शनों के कारण प्रमुख सड़कें और मेट्रो स्टेशन बंद किए जाते हैं, तो रामलीला देखने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घट सकती है। इससे न सिर्फ आयोजकों, बल्कि आयोजन स्थल पर स्टॉल लगाने वाले दुकानदारों और मजदूरों की कमाई भी बुरी तरह प्रभावित होगी।
व्यापारी संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक केंद्रों से दूर करें, ताकि व्यापारियों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
