ब्राजील में लैटिन अमेरिका का सबसे लंबा पुल बना रहा चीन, चुनाव नतीजों पर टिकी अमेरिका की नजर
चीनी कंपनियां ब्राजील में लैटिन अमेरिका के सबसे लंबे केबल-स्टेड (cable-stayed) पुल का निर्माण कर रही हैं। ‘सल्वाडोर-इटापारिका ब्रिज’ (Salvador-Itaparica Bridge) नामक यह प्रोजेक्ट विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन का नया कदम है। चीनी और ब्राजीलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी कंपनियों का एक कंसोर्टियम इस महत्वाकांक्षी क्रॉस-सी (cross-sea) प्रोजेक्ट का मुख्य हिस्सा तैयार कर रहा है। इसके साल 2031 तक पूरा होने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ, 25 अक्टूबर को ब्राजील में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे इस प्रोजेक्ट और चीन-ब्राजील संबंधों की भावी दिशा तय कर सकते हैं। वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच होने वाले ‘रनऑफ’ चुनाव पर वाशिंगटन की भी पैनी नजर है।
46.8 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट और 682 मीटर का स्पैन
सल्वाडोर-इटापारिका ब्रिज अटलांटिक महासागर के किनारे ‘बे ऑफ ऑल सेंट्स’ को पार करेगा। पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई 46.8 किलोमीटर है, जिसमें 12.4 किलोमीटर का समुद्री पुल और 682 मीटर का मुख्य स्पैन शामिल है। एक केबल-स्टेड पुल में वर्टिकल टावरों से बंधे स्टील केबल पूरी सड़क का वजन उठाते हैं।
इस पुल का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया जा रहा है। इसमें ‘चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन’ और ‘चाइना रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन’ (CRCC) शामिल हैं। ब्राजीलियाई न्यूज आउटलेट ‘ब्रासिल 247’ के मुताबिक, यह चीनी कंसोर्टियम पुल से जुड़े आसपास के हाईवे सिस्टम का संचालन और रखरखाव भी करेगा।
चीन से रवाना हुआ विशाल ‘पाइलिंग शिप’
शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, पुल के निर्माण के लिए पूर्वी चीन के जियांग्सू प्रांत से रविवार को एक विशेष ‘पाइलिंग शिप’ रवाना किया गया है। सरकारी कंपनी CRCC की सहायक इकाई द्वारा बनाया गया यह जहाज 45 दिनों में ब्राजील के निर्माण स्थल पर पहुंचेगा। पाइलिंग शिप का इस्तेमाल समुद्र तल की गहराई में स्ट्रक्चरल कॉलम गाड़ने के लिए किया जाता है।
ब्राजील चुनाव: दांव पर कूटनीतिक समीकरण
पुल निर्माण के बीच ब्राजील का चुनावी माहौल कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो अगर जीत दर्ज करते हैं, तो ब्राजील का कूटनीतिक और आर्थिक झुकाव चीन से हटकर अमेरिका की तरफ हो सकता है।
फ्लावियो ने वादा किया है कि वह ब्राजील के ‘रेयर अर्थ’ खनिजों तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को पहुंच देंगे, ताकि चीन पर अमेरिका की निर्भरता कम हो सके। इसके विपरीत, मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा चीन के साथ गहरे संबंधों के पक्षधर माने जाते हैं।
यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के स्ट्रैटेजिक स्टडीज इंस्टीट्यूट में लैटिन अमेरिकी मामलों के रिसर्च प्रोफेसर इवान एलिस का कहना है कि ब्राजील इस समय राजनीतिक और आर्थिक रूप से चीन के लिए एक अनुकूल माहौल दे रहा है। एलिस के मुताबिक, चीन पहले ही वहां पावर ट्रांसमिशन, बंदरगाहों और टेलीकम्युनिकेशन में काफी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुका है। वहां बड़ा आंतरिक बाजार है।
लैटिन अमेरिका में चीन का बढ़ता दखल
प्रोफेसर एलिस ने बताया कि यह पुल लैटिन अमेरिका में बुनियादी ढांचा विकसित करने की चीन की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जहां आर्थिक मुनाफे की संभावनाएं हैं। इससे पहले चीनी कंपनियां पेरू में चांसय मेगापोर्ट (Chancay Megaport) और इक्वाडोर में कोका कोडो सिंक्लेयर डैम (Coca Codo Sinclair Dam) जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी कर चुकी हैं।
सफर और व्यापार में आएगी तेजी
सल्वाडोर-इटापारिका ब्रिज का ग्राउंडब्रेकिंग (शिलान्यास) इसी साल जुलाई में हुआ था। इसके चालू होने के बाद सल्वाडोर और वेरा क्रूज़ शहरों के बीच की दूरी महज 15 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्तमान में इस सफर के लिए एक घंटे की फेरी राइड (नाव) का इस्तेमाल करना पड़ता है।
शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन सुगम होने से स्थानीय स्तर पर उत्पादित अनाज, कपास और फलों की शिपिंग के समय में भी भारी कमी आएगी।
