‘सेंट्रल विस्टा में किताबों के लिए कितनी जगह?’, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, केंद्र को नोटिस

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केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी (Central Secretariat Library) की स्थिति और किताबों के रखरखाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ के तहत प्रस्तावित नई लाइब्रेरी व्यवस्था और किताबों के मौजूदा कलेक्शन के लिए तय की गई जगह को लेकर सरकार से तीन हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।

13 साल से डिब्बों में बंद 2 लाख किताबों पर चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लाइब्रेरी के मौजूदा कलेक्शन की स्थिति पर कड़ी चिंता जाहिर की। अदालत ने कहा कि दिल्ली के आरके पुरम इलाके में लगभग दो लाख किताबें कार्टन (डिब्बों) में पैक करके रखी हुई हैं और 2011 के बाद से उन्हें खोला तक नहीं गया है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मौजूदा कलेक्शन के आकार और भविष्य में नई लाइब्रेरी के भीतर इन किताबों के लिए आवंटित की जाने वाली जगह का पूरा ब्योरा मांगा है।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में स्पेस को लेकर सवाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच और कानूनी प्रक्रिया में मदद के लिए वरिष्ठ वकील हरि प्रिया पद्मनाभन को नियुक्त किया है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी से नई जगह को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर में इतनी बड़ी संख्या में मौजूद किताबों और लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त जगह बचेगी।

अदालत ने विशेष रूप से यह साफ करने का निर्देश दिया है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे कॉन्फ्रेंस रूम और अन्य सुविधाओं का असर कहीं लाइब्रेरी कलेक्शन के लिए उपलब्ध जगह पर तो नहीं पड़ेगा। अब केंद्र सरकार को अगले तीन हफ्तों में अदालत के सामने इस पूरी कार्ययोजना का खाका पेश करना होगा।