October 4, 2026

अमेरिका ने 50 देशों के लिए सख्त किए वीजा नियम, 17 लाख रुपये का ‘बॉन्ड’ किया अनिवार्य; भारत को मिली बड़ी छूट

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अमेरिका जाने का सपना देख रहे दुनिया भर के पर्यटकों और कारोबारी यात्रियों के लिए अमेरिकी सरकार ने प्रवेश के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अमेरिका ने 50 देशों के नागरिकों के लिए ‘वीजा बॉन्ड’ (Visa Bond) अनिवार्य कर दिया है। इस नए नियम के तहत B1 और B2 वीजा चाहने वाले आवेदकों को अपनी यात्रा से पहले 10,000 डॉलर से लेकर 20,000 डॉलर (करीब 8.5 लाख से 17 लाख रुपये) तक की सुरक्षा राशि बतौर बॉन्ड जमा करनी होगी।

भारत के लिए राहत की खबर यह है कि उसे इस कड़े नियम से पूरी तरह बाहर रखा गया है, जिसके चलते भारतीय पासपोर्ट धारकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

क्यों लागू हुआ वीजा बॉन्ड का नियम?

अंतिम रूप से जारी किए गए नियमों के अनुसार, यह वीजा बॉन्ड एक प्रकार की वित्तीय गारंटी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह कदम ‘वीजा ओवरस्टे’ (Visa Overstay) की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए उठाया है। अक्सर कई देशों के नागरिक अमेरिका का टूरिस्ट या बिजनेस वीजा लेकर वहां जाते हैं और वीजा की तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी वापस नहीं लौटते। नए नियमों के तहत अब अमेरिकी कांसुलर अधिकारी वीजा इंटरव्यू के दौरान यह तय करेंगे कि आवेदक को 10,000 डॉलर, 15,000 डॉलर या 20,000 डॉलर में से कितनी बॉन्ड राशि भरनी होगी।

कब वापस मिलेंगे रुपये और कब होंगे जब्त?

वीजा बॉन्ड की यह भारी-भरकम रकम डीएचएस (DHS) फॉर्म I-352 भरकर अमेरिकी ट्रेजरी के आधिकारिक पोर्टल Pay.gov पर जमा करनी होगी।

  • यदि यात्री तय समय सीमा के भीतर अमेरिका से अपने देश वापस लौट आता है, तो उसका पूरा पैसा अमेरिकी डॉलर में वापस कर दिया जाएगा।

  • यदि यात्री ने तय तारीख से ज्यादा दिन अमेरिका में बिताए या अपनी वीजा शर्तों का उल्लंघन किया, तो उसकी पूरी रकम अमेरिकी प्रशासन द्वारा जब्त कर ली जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल बॉन्ड की रकम भरने से वीजा मिलने की कोई गारंटी नहीं होती है।

सफर के लिए सिर्फ कमर्शियल उड़ानों की अनुमति

वीजा बॉन्ड के दायरे में आने वाले इन 50 देशों के यात्रियों के लिए यात्रा के तरीके भी सीमित कर दिए गए हैं। इस श्रेणी के यात्रियों को सिर्फ कमर्शियल उड़ानों (Commercial Flights) के माध्यम से ही अमेरिका में प्रवेश करने और वहां से वापस लौटने की अनुमति होगी। वे किसी भी चार्टर प्लेन, निजी विमान, समुद्री मार्ग या जमीनी बॉर्डर के जरिए अमेरिका में प्रवेश या निकास नहीं कर सकेंगे।

पड़ोसियों पर सख्ती, भारत को उनके रिकॉर्ड से मिला फायदा

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने वाले यात्रियों (ओवरस्टे डेटा) के आधार पर इन 50 देशों की सूची तैयार की है। इस सूची में भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश, नेपाल और भूटान भी शामिल हैं। इसके अलावा क्यूबा, नाइजीरिया, वेनेजुएला, जिम्बाब्वे, कंबोडिया और इथियोपिया जैसे देशों के नागरिकों को भी बॉन्ड भरना होगा।

भारत में वीजा नियमों के पालन का रिकॉर्ड बेहतर रहा है, जिसके कारण भारतीय पासपोर्ट धारकों को इस बॉन्ड से छूट दी गई है। भारत के नागरिकों को केवल सामान्य वीजा प्रक्रिया से गुजरना होगा और तय फीस ही देनी होगी। इस छूट के कारण अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों, व्यापारियों और पर्यटकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय नियम लागू नहीं होगा।