30 सीट से शुरू हुई बात 185 तक पहुंची, आखिर सपा-कांग्रेस का फॉर्मूला क्या है?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का पेंच उलझता जा रहा है। दोनों प्रमुख दल साथ चुनाव लड़ने पर सहमत हैं, लेकिन असली खींचतान इस बात पर है कि 403 सीटों वाली विधानसभा में किसके हिस्से कितनी सीटें आएंगी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर गठबंधन में सीटों की संख्या के बजाय जीत सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा गठबंधन धर्म निभाती आई है।
सीटों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर एक नया गणित निकाला जा रहा है। कांग्रेस 100 से 150 सीटों के बीच अपनी दावेदारी कर रही है, जबकि सपा इतनी बड़ी हिस्सेदारी देने के पक्ष में नहीं है।
30 बनाम 185: 2024 के नतीजों पर सपा का फॉर्मूला
सीट शेयरिंग को लेकर सपा की ओर से 2024 के लोकसभा चुनाव का तर्क दिया जा रहा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 17 पर चुनाव लड़ा था और 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
सपा का गणित है कि अगर एक लोकसभा सीट के दायरे में औसतन 5 विधानसभा सीटें मानी जाएं, तो जीती हुई 6 लोकसभा सीटों के आधार पर कांग्रेस का हिस्सा 30 विधानसभा सीटों का बनता है। सपा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इसी हिसाब से कांग्रेस को 30 सीटें मिलनी चाहिए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अखिलेश यादव कांग्रेस को 60 सीटें तक देने के लिए तैयार हो सकते हैं।
कांग्रेस का पलटवार- बाकी बची 188 सीटों का क्या होगा?
कांग्रेस ने सपा के सामने इसी फॉर्मूले को पलटकर रख दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर लोकसभा नतीजों को विधानसभा सीटों में बदलकर हिस्सेदारी तय करनी है, तो यह नियम सपा पर भी लागू होना चाहिए।
2024 में सपा ने उत्तर प्रदेश की 37 लोकसभा सीटें जीती थीं। कांग्रेस के मुताबिक, एक लोकसभा सीट के बदले पांच विधानसभा सीट का फॉर्मूला अपनाया जाए तो 37 का आंकड़ा 185 विधानसभा सीटों तक पहुंचता है। कांग्रेस का सीधा सवाल है कि अगर सपा के खाते में 185 सीटें और कांग्रेस के हिस्से में 30 सीटें आती हैं, तो दोनों दल मिलकर सिर्फ 215 सीटों पर ही चुनाव लड़ेंगे। 403 में से बाकी बचने वाली 188 सीटों का क्या होगा? इसी सवाल को आधार बनाकर कांग्रेस गठबंधन में बराबर की हिस्सेदारी की मांग कर रही है।
खींचतान के बीच अखिलेश और आराधना मिश्रा के बयान
सीटों की इस रस्साकशी के बीच अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि जब मकसद साफ हो तो साथ मिलकर आगे बढ़ना आसान होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गठबंधन में कितनी सीटें किस पार्टी को मिलेंगी, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि सभी मिलकर जीत सुनिश्चित करें।
इसके जवाब में आराधना मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी गठबंधन की जिम्मेदारी निभाई है और आगे भी निभाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2027 में भाजपा सरकार को हटाना और इंडिया ब्लॉक की सरकार बनाना पार्टी का मुख्य लक्ष्य है।
गठबंधन का पुराना इतिहास और कांग्रेस का नया दावा
सपा और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन का एक लंबा इतिहास रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने ‘यूपी के लड़के’ का नारा देकर साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन गठबंधन उम्मीद के मुताबिक कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस से अलग होकर कई छोटे दलों के साथ बड़ा गठबंधन बनाया। इस मोर्चे को कुल 111 सीटें मिलीं और भाजपा की सीटें पिछली बार के मुकाबले 57 कम हुईं।
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस एक बार फिर साथ आए। दोनों पार्टियों ने मिलकर उत्तर प्रदेश की 80 में से 43 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों के बाद कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है और इसी बढ़ते जनाधार के आधार पर पार्टी विधानसभा चुनाव में 100 से 150 सीटों पर अपना दावा मजबूत मान रही है।
