सऊदी अरब की ढाल बनेगा पाकिस्तान, 25000 सैनिकों की करेगा तैनाती; देगा मिसाइलें और ड्रोन
यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) द्वारा सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों के बीच पाकिस्तान ने एक बड़ा कूटनीतिक और सैन्य कदम उठाया है। इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों पर हूतियों के हमले के बाद उपजी चिंताओं को देखते हुए पाकिस्तान ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) की सैन्य मदद करने का फैसला किया है।
इस रणनीति के तहत पाकिस्तान सऊदी अरब में अपने सैनिकों की संख्या 15,000 से बढ़ाकर 25,000 करेगा। यह कदम हाल ही में हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ (Makkah Joint Defense Pact) के तहत उठाया जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये (Turkey) शामिल हैं।
सैनिकों के साथ हथियार और एयर डिफेंस भी देगा पाकिस्तान
पाकिस्तान की तरफ से सऊदी अरब को मिलने वाली यह सैन्य मदद केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं होगी। रक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए पाकिस्तान सऊदी अरब को निम्न सैन्य उपकरण भी मुहैया कराएगा:
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एयर डिफेंस सिस्टम (Air Defense System)
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रॉकेट और मिसाइलें
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अत्याधुनिक ड्रोन (Drones)
इन हथियारों का उद्देश्य सऊदी अरब की रक्षा क्षमता (Defense Power) को बढ़ाना है ताकि वह हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों का माकूल जवाब दे सके।
क्या है ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’?
7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ हुआ था। इस समझौते की तर्ज नाटो (NATO) जैसी है, जिसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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तीनों देश एक-दूसरे को रक्षा सहयोग प्रदान करेंगे।
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यदि तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और वे मिलकर दुश्मन का सामना करेंगे।
हालांकि, यह समझौता अभी पूरी तरह से सक्रिय (Active) नहीं हुआ है, लेकिन सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही जारी है।
रियाद में हुई सैन्य प्रमुखों की बैठक
हूती हमलों के बीच 25 सितंबर 2026 को सऊदी अरब की राजधानी रियाद (Riyadh) में पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के सैन्य प्रमुखों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में:
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हूती विद्रोहियों के हमलों की कड़ी निंदा की गई।
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इस्लाम के पवित्र स्थलों की सुरक्षा के प्रति एकजुटता और प्रतिबद्धता दोहराई गई।
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इसी बैठक के बाद पाकिस्तान ने अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाने का अंतिम फैसला लिया।
जल्द ही रियाद में होगी इमरजेंसी मीटिंग, ईरान के प्रस्ताव पर भी नजर
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के मुताबिक, अगले सप्ताह रियाद में तीनों देशों के प्रतिनिधियों की एक आपातकालीन बैठक (Emergency Meeting) होने वाली है।
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इस बैठक में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को फाइनल रूप दिया जा सकता है।
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6 से अधिक अन्य देशों ने भी इस रक्षा समझौते में शामिल होने की इच्छा जताई है, लेकिन जब तक मूल समझौता लागू नहीं हो जाता, नए सदस्यों को नहीं जोड़ा जाएगा (इसमें लगभग एक साल लग सकता है)।
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इसके अलावा, बैठक में ईरान (Iran) द्वारा हूती विद्रोहियों को लेकर दिए गए एक अनौपचारिक प्रस्ताव पर भी मंथन किया जाएगा। (पाकिस्तान और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हालिया विचार-विमर्श के दौरान यह प्रस्ताव सामने आया था)।
