यूपी में 100 से ज्यादा विधायकों का टिकट काटेगी BJP? 2024 की हार से लिया सबक

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Election 2027) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित हार से सबक लेते हुए पार्टी हाईकमान ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आगामी चुनावों में नेताओं का आपसी टकराव और गुटबाजी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीजेपी इस बार टिकट बंटवारे में कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। हाईकमान ने तय किया है कि किसी भी बड़े नेता के ‘चहेतों’ को तरजीह देने के बजाय, केवल जमीनी सर्वे और ‘जिताऊ’ क्षमता के आधार पर ही टिकट दिए जाएंगे। सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) से निपटने के लिए पार्टी 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है।

लोकसभा चुनाव 2024 की गलतियों से लिया सबक

बीजेपी के आंतरिक आकलन के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच दिखा आपसी टकराव पार्टी को भारी पड़ा था।

  • आंकड़ों में गिरावट: 2019 में यूपी की 80 में से 62 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2024 में मात्र 36 सीटों पर सिमट गई। पार्टी का वोट शेयर भी 49.6% से गिरकर 41.4% पर आ गया।

  • सांसदों को रिपीट करने का खामियाजा: पार्टी ने 49 मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट दिया था, जिनमें से 27 चुनाव हार गए। 33 सांसदों को तीसरी या उससे अधिक बार मौका दिया गया, जिनमें से 20 को हार का सामना करना पड़ा।

  • दिग्गजों की हार: स्मृति ईरानी, अजय मिश्रा टेनी, कौशल किशोर, महेंद्र नाथ पांडेय, संजीव बालियान, मेनका गांधी, राजवीर सिंह, लल्लू सिंह और सुब्रत पाठक जैसे बड़े चेहरों को भी हार का स्वाद चखना पड़ा।

भीतरघात, अति-आत्मविश्वास, प्रशासन के असहयोग और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के चलते मुजफ्फरनगर जैसी अहम सीट पर संजीव बालियान 24,672 वोटों से चुनाव हार गए, जहां मतदान प्रतिशत में 9.07% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

टिकट बंटवारे का नया ब्लूप्रिंट: युवा और महिलाओं पर फोकस

लोकसभा चुनाव की इन गलतियों को सुधारते हुए, विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने टिकट वितरण का सख्त खाका तैयार किया है:

  • शीर्ष नेतृत्व की आम राय: टिकट बंटवारे में नेताओं के अहम का टकराव नहीं होने दिया जाएगा। थोपे गए उम्मीदवारों के बजाय आपसी सहमति और सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा।

  • विधायकों के टिकट पर कैंची: वर्तमान 255 बीजेपी विधायकों में से उन 100 से अधिक विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं, जिनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा है या जिनके खिलाफ क्षेत्र में भारी सत्ता विरोधी लहर है।

  • नए चेहरों को मौका: पार्टी इस बार युवाओं और महिलाओं को बड़ी संख्या में चुनावी मैदान में उतारेगी। कई बार से जीत रहे विधायकों को भी केवल उनके वर्तमान प्रदर्शन के आधार पर ही दोबारा मौका मिलेगा।

जमीनी स्तर पर डैमेज कंट्रोल और संगठन की मजबूती

बीजेपी ने पिछले दो सालों में अपनी कमियों को दूर करने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पूरे राज्य का दौरा किया है और नई टीम में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार मंडलों का दौरा कर रहे हैं और विधायकों व जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं। संगठन महासचिव बी.एल. संतोष ने भी कार्यकर्ताओं को केंद्र में रखकर कई कड़े संगठनात्मक निर्देश जारी किए हैं।

इसके साथ ही, एसआईआर (SIR) के बाद नई मतदाता सूची को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने बूथ स्तर तक कमेटियों का पुनर्गठन किया है। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए वृहद जनजागरण और जनसंपर्क अभियान शुरू किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में मिली अपनी हालिया सफलता के बाद, बीजेपी उत्तर प्रदेश जैसे अपने सबसे अहम गढ़ में कोई सरप्राइज या ‘फिसलन’ नहीं चाहती, क्योंकि यह विपक्ष को संजीवनी दे सकता है। राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार (हैट्रिक) बनाने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।