‘लड़कियों पर पाबंदी थोपना हल नहीं, लड़कों की परवरिश पर भी हो बात’; सीएम रेखा गुप्ता
राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराधों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ लड़कियों पर पाबंदियां लगाना समस्या का समाधान नहीं है। मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल परिवार पर न डालते हुए पुलिस, प्रशासन और न्याय व्यवस्था की जवाबदेही भी तय करने की बात कही है।
लड़कियों की पाबंदी के बजाय लड़कों की परवरिश पर हो बहस
दिल्ली स्थित मैत्रेयी कॉलेज के डायमंड जुबली समारोह को संबोधित करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने समाज के रवैये पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब भी महिलाओं या लड़कियों से जुड़ी आपराधिक घटनाएं सामने आती हैं, तो परिवार और समाज की पहली प्रतिक्रिया लड़कियों पर ही पाबंदी लगाने की होती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ लड़कियों की ही क्यों होनी चाहिए। समाज को लड़कों के व्यवहार, महिलाओं के प्रति उनके सम्मान की भावना और उनकी परवरिश पर भी उतनी ही गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए।
‘ना का मतलब सिर्फ ना ही होता है’
मुख्यमंत्री ने लड़कों को बचपन से ही सहमति (Consent) की अहमियत समझाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते या परिस्थिति में लड़की की ‘ना’ का मतलब सिर्फ ‘ना’ ही होता है।
अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के स्वतंत्रता दिवस भाषण का भी हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय भी लाल किले की प्राचीर से बेटियों को सलाह देने के बजाय बेटों से सवाल करने और उन्हें सही दिशा दिखाने का आह्वान किया गया था।
डीयू की छात्राओं का सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन
दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ यौन अपराधों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की छात्राएं भी बड़ी संख्या में सुरक्षा की मांग को लेकर लामबंद हैं। इन प्रदर्शनों में युवतियां सीधे तौर पर यह सवाल उठा रही हैं कि महिला सुरक्षा के नाम पर बार-बार उनकी आजादी पर पाबंदी क्यों लगाई जाती है।
