September 21, 2026

‘यूपी का 4 हिस्सों में बंटना तय, पूर्वांचल का पहला CM राजभर का बेटा ही होगा’: देवरिया में ओम प्रकाश राजभर का बड़ा दावा

op rajbhar

उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि आने वाले समय में प्रदेश का चार हिस्सों में बंटवारा होना तय है। देवरिया के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज में आयोजित ‘सामाजिक समरसता महारैली’ को संबोधित करते हुए राजभर ने कहा कि जिस दिन पूर्वांचल अलग राज्य बनेगा, उसका पहला मुख्यमंत्री राजभर का बेटा ही होगा।

‘पूर्वांचल की आबादी के हिसाब से तय होगा सीएम’

महारैली के मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और एक न एक दिन इसका बंटवारा होना निश्चित है। उन्होंने कहा, “चाहे आज हो, कल हो या परसों हो, यह होना तय है।”

राजभर ने दावा किया कि पूर्वांचल में जिस तरह की आबादी है, उसके आधार पर जब भी नए राज्य का गठन होगा, तो गठबंधन की स्थिति में पहला मुख्यमंत्री राजभर का बेटा ही बनेगा। इस दौरान उन्होंने अंबेडकर नगर में अपनी पार्टी की स्थिति और समीकरणों का भी विशेष रूप से जिक्र किया।

27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के बंटवारे की मांग

अलग राज्य की मांग के साथ-साथ सुभासपा प्रमुख ने पिछड़ी जातियों के लिए निर्धारित 27 फीसदी आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि इस 27 प्रतिशत कोटे का भी जातियों की संख्या के आधार पर बंटवारा होना चाहिए।

उनके मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में आरक्षण का लाभ सिर्फ कुछ ही जातियों तक सीमित रह गया है। उन्होंने तर्क दिया कि इसका फायदा आबादी के अनुपात में सभी पिछड़ी जातियों को समान रूप से मिलना चाहिए।

2011 में मायावती सरकार ला चुकी है प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में विभाजित करने की मांग राज्य की राजनीति में पहले भी उठती रही है। इससे पहले साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने भी विधानसभा में प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पेश किया था। उस प्रस्ताव में यूपी को पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश और अवध प्रदेश में विभाजित करने की रूपरेखा तैयार की गई थी। हालांकि, उस समय केंद्र सरकार की ओर से इस दिशा में कोई प्रशासनिक या संवैधानिक कदम नहीं उठाया गया था।