चुनाव आयोग ने कपिल सिब्बल, लालकृष्ण आडवाणी और एस. जयशंकर समेत कई दिग्गजों को भेजा नोटिस, जानें वजह
चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में संशोधन के लिए चलाई जा रही ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के तहत देश के कई बड़े नेताओं और शीर्ष अधिकारियों के मतदाता रिकॉर्ड जांच के दायरे में आ गए हैं। रिकॉर्ड में विसंगतियां पाए जाने पर चुनाव आयोग ने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और खुद चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत कई प्रमुख हस्तियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण या दस्तावेज मांगे हैं।
किन-किन दिग्गजों को मिला नोटिस?
रिपोर्ट्स के अनुसार, SIR के तहत जिन प्रमुख हस्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
-
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कपिल सिब्बल
-
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी
-
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी केएस जयशंकर
-
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्य
-
चुनाव आयुक्त एसएस संधू
-
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी
-
विदेश सचिव विक्रम मिस्री
आखिर बड़े नामों को क्यों भेजा गया नोटिस?
SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग पुराने मतदाता रिकॉर्ड और मौजूदा डेटा का मिलान कर रहा है। इन दिग्गजों को नोटिस उनके राजनीतिक या प्रशासनिक पद के कारण नहीं, बल्कि उनके रिकॉर्ड में मिली तकनीकी खामियों के चलते भेजा गया है।
-
स्पेलिंग की गलती: चुनाव आयुक्त एसएस संधू के मामले में मतदाता रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग में अंतर सामने आया है।
-
पुराने रिकॉर्ड से बेमेल: कपिल सिब्बल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के मामलों में मौजूदा नाम और विवरण पुराने SIR रिकॉर्ड से मैच नहीं हो रहे हैं, जिसके चलते सत्यापन के लिए नोटिस भेजा गया है।
नोटिस का मतलब वोटर लिस्ट से नाम कटना नहीं
चुनाव आयोग की इस कार्रवाई का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इन दिग्गजों का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। SIR के तहत नोटिस मिलना सत्यापन प्रक्रिया का एक हिस्सा है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को रिकॉर्ड का सत्यापन कराने, आवश्यक सही दस्तावेज उपलब्ध कराने या अपनी आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर मिलता है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भी SIR के दौरान ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज’ के आधार पर कई रिकॉर्ड चिह्नित किए गए थे, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शी सत्यापन और मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का मौका देने का निर्देश दिया था।
क्या है SIR (Special Intensive Revision)?
SIR चुनाव आयोग की मतदाता सूची को गहन तरीके से अपडेट और सत्यापित करने की एक राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति या फर्जी नाम सूची में न रहे।
मई 2026 में चुनाव आयोग ने SIR के तीसरे चरण के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था। इस चरण में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जाना है, जिसके लिए 3.94 लाख से अधिक बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं। फिलहाल हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को इस चरण से बाहर रखा गया है, जिनके लिए अलग से कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
