7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात संभव
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने की प्रबल संभावना है। सूत्रों के अनुसार, दोनों शीर्ष नेताओं की यह मुलाकात 12 सितंबर को हो सकती है। चीन सरकार इस पर जल्द ही आधिकारिक घोषणा कर सकती है। यदि यह वार्ता होती है, तो साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुए हिंसक सैन्य टकराव के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली आमने-सामने की औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होगी।
7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह दौरा दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत आ रहे हैं। 2020 के सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के राजनीतिक, सैन्य और व्यापारिक संबंधों में भारी तनाव आ गया था। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य स्तर की वार्ताओं के जरिए रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
LAC, सीधी उड़ानें और व्यापार पर फोकस
इस संभावित बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थायी शांति स्थापित करना और सैन्य तनाव को घटाना सबसे बड़ा एजेंडा होगा। इसके साथ ही:
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दोनों देशों के बीच सीधी यात्री उड़ानों की बहाली पर बातचीत हो सकती है।
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द्विपक्षीय व्यापार, सीमा पार निवेश और आर्थिक सहयोग को गति देने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
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विशेष प्रतिनिधियों और सीमा मामलों के वर्किंग मैकेनिज्म की प्रगति की समीक्षा हो सकती है।
रेयर अर्थ मिनरल्स पर समझौते की संभावना
शी जिनपिंग के इस दौरे के दौरान दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भी सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और हरित ऊर्जा में इस्तेमाल होने वाले इन मिनरल्स और मैग्नेट्स की वैश्विक आपूर्ति में चीन का दबदबा है। भारत अपनी कई आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के लिए इन खनिजों के आयात पर निर्भर है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सुरक्षित और निर्बाध सप्लाई चेन को लेकर सहमति बनने पर उद्योग जगत की खास नजर रहेगी, हालांकि अभी इस समझौते की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।
