September 15, 2026

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: दिल्ली में होगी मेजबानी, जानें भारत के लिए अहमियत

pm-modi-speech

राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। यह अहम आयोजन दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में होगा, जिसमें सदस्य और पार्टनर देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच प्रोग्राम के तहत कई अन्य वैश्विक नेता भी शिरकत करेंगे।

भारत इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इस वर्ष की थीम ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण’ तय की गई है। दो दिनों तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर मंथन करेंगे। इसके अलावा साझा प्राथमिकताओं पर समूह के भीतर सहयोग को मजबूत करने की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।

देश के 25 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें

इस साल भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को धार देने के लिए अब तक देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और हाई-लेवल मीटिंग्स हो चुकी हैं। शिखर सम्मेलन से ठीक पहले ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की अंतिम बैठक 9-10 सितंबर को मुंबई में आयोजित की जा रही है।

क्या है ब्रिक्स और इसमें कौन शामिल?

साल 2006 में एक अनौपचारिक समूह के रूप में अस्तित्व में आए ब्रिक्स का पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को हुआ था। वर्तमान में यह दुनिया के 11 प्रमुख विकासशील देशों को एक मंच पर लाता है। इसके सदस्यों में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

भारत इस समूह का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। 1 जनवरी 2026 को भारत ने चौथी बार इसकी कमान संभाली है। खास बात यह है कि इस वर्ष ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 साल भी पूरे कर रहा है।

भारत के लिए ब्रिक्स का कूटनीतिक महत्व

ब्रिक्स भारत, चीन और रूस को एक ही मंच पर लाने के साथ-साथ विकासशील दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और ऊर्जा उत्पादक देशों से जोड़ता है। यह समूह भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं) की आवाज के तौर पर स्थापित करने का एक बड़ा मंच प्रदान करता है, जो मौजूदा विदेश नीति का प्रमुख लक्ष्य है। इस समूह के जरिए भारत अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ अपनी साझेदारी बरकरार रखते हुए चीन और रूस के साथ भी कूटनीतिक संतुलन साध सकता है।

वैश्विक संस्थाओं में सुधार की उठती रही है मांग

यह समूह लंबे समय से यूनाइटेड नेशंस (UN), इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) और वर्ल्ड बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की वकालत कर रहा है। ब्रिक्स देशों का तर्क है कि इन संस्थानों की वर्तमान कार्यप्रणाली में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक आर्थिक ताकत और उनके प्रतिनिधित्व को सही तरीके से जगह नहीं दी गई है।

शी जिनपिंग का दौरा और आर्थिक मुद्दे

इस शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना सबसे ज्यादा चर्चा में है। जानकारों का मानना है कि उनकी उपस्थिति से भारत-चीन के बीच चल रहे मुश्किल द्विपक्षीय संबंधों को संभालने में बड़ी मदद मिल सकती है।