कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: 120 युवा नेताओं का इंटरव्यू ले रहे राहुल गांधी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पार्टी को ‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ और बुजुर्ग नेताओं की जकड़न से बाहर निकालने के लिए एक अहम अभियान छेड़ा है। दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल 120 संभावित युवा नेताओं का सीधे इंटरव्यू ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सिफारिशों की व्यवस्था को खत्म कर पार्टी में एक आक्रामक और वैचारिक रूप से मजबूत युवा लीडरशिप तैयार करना है।
10-10 के ग्रुप में पूछे जा रहे सीधे सवाल
इस अनूठी चयन प्रक्रिया के लिए देश भर से छांटे गए होनहार नेताओं को 10-10 के समूहों में राष्ट्रीय राजधानी बुलाया जा रहा है। राहुल गांधी खुद हर उम्मीदवार के वर्षों के काम का लेखा-जोखा और ‘रिपोर्ट कार्ड’ लेकर बैठे हैं। वे उम्मीदवारों से उनके पुराने प्रदर्शन, भविष्य के राजनीतिक विजन और जनहित के मुद्दों पर पकड़ को लेकर तीखे सवाल कर रहे हैं। रायबरेली दौरे से लौटने के बाद राहुल गांधी इस इंटरव्यू प्रक्रिया को और तेज करेंगे।
60 फीसदी निष्क्रिय सचिवों की होगी छुट्टी
इस पूरी पारदर्शी कवायद का सीधा निशाना वे पदाधिकारी हैं जो पद लेकर लंबे समय से निष्क्रिय बैठे हैं। चयन प्रक्रिया के जरिए करीब 60 फीसदी से अधिक मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों को हटाकर उनकी जगह नए और ऊर्जावान चेहरों को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी है।
‘संगठन सृजन’ में काम करने वालों को प्राथमिकता
इस महा-इंटरव्यू प्रक्रिया में उन नेताओं को विशेष तरजीह दी जा रही है जिन्होंने ‘संगठन सृजन’ जैसे अभियानों में ऑब्जर्वर बनकर जमीनी स्तर पर काम किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि मेहनत करने वाले कार्यकर्ता को उसका वाजिब हक नहीं मिलेगा, तो युवाओं का राजनीति से भरोसा उठ जाएगा। समाज के हर वर्ग और क्षेत्र से आने वाले युवाओं को मिलाकर एक सर्वसमावेशी राष्ट्रीय टीम का गठन किया जा रहा है।
2004 का ‘जनरेशन चेंज’ प्रोजेक्ट
पार्टी के भीतर ‘जनरेशन चेंज’ (पीढ़ीगत बदलाव) राहुल गांधी का एक पुराना और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है। साल 2004 में राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने यूथ कांग्रेस और NSUI में भी चुनाव और इंटरव्यू के जरिए बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं को आगे लाने का प्रयोग किया था। उस वक्त पार्टी के पुराने दिग्गजों (ओल्ड गार्ड) के कड़े विरोध और अंदरूनी खींचतान के चलते यह मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था। अब ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर से लेकर दिल्ली मुख्यालय तक युवाओं को जिम्मेदारी सौंपकर उस दो दशक पुराने विजन को धरातल पर उतारा जा रहा है।
