September 15, 2026

संजय दत्त ने मराठी बोलने से किया इनकार, पूर्व DIG ने सुनाया जेल का दिलचस्प किस्सा

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मुंबई में एक दही हांडी कार्यक्रम के दौरान बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त और राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के बीच एक दिलचस्प वाकया सामने आया। कार्यक्रम में संजय दत्त जब हिंदी में बोल रहे थे, तब मंत्री ने उन्हें मराठी में बात करने के लिए टोका। इस पर अभिनेता ने साफ इनकार करते हुए मंच से ही कह दिया कि वह 6 साल तक जेल में रहे, लेकिन मराठी नहीं सीख पाए। इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र जेल विभाग की पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) स्वाति साठे ने अभिनेता के जेल के दिनों से जुड़ा एक किस्सा साझा किया है।

‘संजू, तू बातों की जबान समझेगा या लातों की?’ पूर्व डीआईजी स्वाति साठे ने याद करते हुए बताया कि जेल में संजय दत्त भले ही मराठी नहीं सीख पाए, लेकिन उन्होंने डराने-धमकाने की भाषा बहुत जल्दी समझ ली थी। उनके मुताबिक, आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद दत्त काफी सदमे में थे और जेल के माहौल में ढल नहीं पा रहे थे। जब उन्हें पहली बार जेल लाया गया, तो उन्होंने कैदियों वाली सफेद यूनिफॉर्म पहनने से मना कर दिया और वॉर्डन के साथ बदसलूकी की।

सख्त अनुशासन के लिए पहचानी जाने वालीं तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट स्वाति साठे को जब इसकी जानकारी मिली, तो वह गुस्से में सीधे उनकी बैरक में पहुंचीं। साठे ने अपनी लाठी दत्त की ओर करते हुए सीधी चेतावनी दी, “संजू, तू बातों की जबान समझेगा या लातों की?”

धमकी का असर और जेल रेडियो की शुरुआत साठे के इस सख्त रवैये से दत्त घबरा गए और तुरंत चेंजिंग रूम जाकर जेल की यूनिफॉर्म पहन ली। साठे का कहना है कि उस दिन के बाद से अभिनेता ने जेल में कभी कोई नखरे नहीं दिखाए। धीरे-धीरे उनके जेल प्रशासन के साथ संबंध बेहतर हो गए। उन्होंने न सिर्फ जेल अधिकारियों को कई कार्यक्रमों के आयोजन में मदद की, बल्कि अपनी फिल्म ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ से प्रेरित होकर जेल रेडियो का भी संचालन किया।

बता दें कि मुंबई की स्पेशल टाडा कोर्ट ने एके-47 रखने के मामले में दत्त को छह साल की सजा सुनाई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे घटाकर पांच साल कर दिया था। पैरोल और फर्लो जैसी रियायतों के चलते उन्होंने जेल में चार साल से कुछ अधिक का वक्त बिताया था।

मराठी की डेडलाइन और सियासी पेंच संजय दत्त का यह वाकया ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र में टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा का मुद्दा गरमाया हुआ है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने हाल ही में चालकों को 15 अगस्त तक मराठी सीखने की मोहलत दी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भाषा न सीखने वालों के परमिट सस्पेंड कर दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिंदी भाषी लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस आदेश को एक साल के लिए टाल दिया है। फैसले को टालने के इस कदम से सरनाइक और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है।