आयुक्त के दरबार तक पहुंची किसानों की पीड़ा, जानें गन्ना समिति अध्यक्ष संघ की 8 बड़ी मांगें
लखनऊ में आज गन्ना किसानों और सहकारी समितियों से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया. उत्तर प्रदेश सहकारी गन्ना समिति अध्यक्ष संघ के प्रतिनिधिमंडल ने गन्ना आयुक्त महोदया से मुलाकात की और उनके सामने अपनी वो समस्याएं रखीं, जो लंबे वक्त से किसानों और समितियों को परेशान कर रही थीं.
संघ के अध्यक्ष सिद्धांत कुमार सिंह की अगुवाई में गए इस प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि गन्ना समितियां किसानों की रीढ़ की हड्डी हैं, और अगर इनके निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनका हक और सही भूमिका नहीं मिलेगी, तो समितियों का सही ढंग से चलना मुश्किल हो जाएगा.
आखिर मांग क्या-क्या रखी गई?
1. मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कई अहम मुद्दे उठाए. सबसे पहले तो यही कहा गया कि जब भी समिति से जुड़ी कोई सुरक्षा बैठक बुलाई जाए, तो उसमें अध्यक्ष और प्रबंध समिति को बुलाना अनिवार्य किया जाए, ताकि फैसलों में उनकी भागीदारी बनी रहे.
2. इसके अलावा FDR यानी फिक्स्ड डिपॉजिट रिसीट कराने का अधिकार भी प्रबंध समिति को दिए जाने की मांग रखी गई. साथ ही ये भी कहा गया कि DCO और DYCC स्तर पर जो FDR की व्यवस्था अभी चल रही है, उसकी एक बार समीक्षा जरूर होनी चाहिए.
3. एक बड़ी मांग ये भी थी कि जैसे PACS यानी प्राथमिक कृषि साख समितियों में अध्यक्ष और सचिव दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर की व्यवस्था है, वैसी ही व्यवस्था गन्ना समितियों में भी लागू की जाए.
4. प्रतिनिधिमंडल ने पारदर्शिता को लेकर भी बात रखी. उनका कहना था कि समिति से जुड़े किसी भी सामान की खरीद पारदर्शी निविदा प्रक्रिया से ही होनी चाहिए, ताकि कहीं कोई गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.
5. साथ ही ये भी मांग की गई कि समिति से जुड़े जो भी सरकारी पत्र या आदेश जारी होते हैं, उनकी कॉपी अध्यक्ष तक जरूर पहुंचाई जाए, क्योंकि अभी तक ऐसा नियमित रूप से नहीं हो पा रहा था.
6. अधिकारियों के तबादले और तैनाती को लेकर भी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई.
7. साथ ही अध्यक्ष या प्रबंध समिति की तरफ से जो भी शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं, उनकी जांच तय समय के भीतर और बिना किसी पक्षपात के होने की मांग रखी गई.
8. एक और अहम बिंदु ये था कि गन्ना आयुक्त की तरफ से पहले जो निर्देश जारी हो चुके हैं – खासकर 555/सी और 473/एवं अन्य, उनका पालन सख्ती से कराया जाए.
आयुक्त ने दिया भरोसा
प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनने के बाद गन्ना आयुक्त महोदया ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और जरूरी कार्रवाई का भरोसा दिलाया. उन्होंने माना कि किसानों और समितियों से जुड़ी ये समस्याएं वाकई ध्यान देने लायक हैं.
इस बैठक में सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए गन्ना सहकारी समितियों के निर्वाचित अध्यक्ष और पदाधिकारी भी मौजूद रहे. आपको बता दें कि ये मामला किसी एक इलाके तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के गन्ना किसानों से जुड़ा हुआ है.
