September 15, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर्स को लगाई फटकार, कहा- ब्रोशर में किए वादे केवल मार्केटिंग नहीं, उसी के अनुसार देना होगा प्रोजेक्ट

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रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की शुरुआत में ग्राहकों को लुभाने के लिए ब्रोशर और वेबसाइट्स पर बड़े-बड़े वादे करने और बाद में मुकर जाने वाले बिल्डर्स पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रोजेक्ट ब्रोशर में संभावित होमबायर्स से किए गए वादों को महज ‘मार्केटिंग मैटेरियल’ बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बिल्डर्स की यह जिम्मेदारी है कि वे आवासीय परियोजना का निर्माण और डिलीवरी बिल्कुल उसी तरह करें, जिसका वादा ग्राहकों से किया गया था।

DLF ‘द प्राइमस’ प्रोजेक्ट पर सुनवाई के दौरान की तल्ख टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी दिल्ली-एनसीआर के नामी बिल्डर, गुरुग्राम स्थित DLF होम डेवलपर्स के ‘द प्राइमस’ प्रोजेक्ट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने प्रोजेक्ट की मूल योजना में प्रस्तावित 24 मीटर चौड़ी सड़क में बार-बार किए गए बदलावों पर कड़ी नाराजगी जताई।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने दो टूक शब्दों में कहा कि आवासीय परियोजना के ब्रोशर में बताई गई सुविधा, लेआउट या अन्य वादे केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नहीं माने जा सकते। डेवलपर को परियोजना को ठीक उसी तरह विकसित करना होगा जैसा कि शुरुआत में खरीदारों के सामने पेश किया गया था।

सड़क में बदलाव मामूली नहीं, CBI रिपोर्ट में खुली पोल सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त आदेश केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट के बाद आया है। कोर्ट ने सीबीआई को 24 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण और प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों की प्रारंभिक जांच का निर्देश दिया था।

दस्तावेजों और सीबीआई रिपोर्ट के अनुसार, 24 मीटर चौड़ी रोड के लिए प्रस्तावित 147 मीटर लंबे हिस्से में से लगभग 52 मीटर को बिल्डर ने ग्रीन एरिया बना दिया है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग 100 मीटर की सड़क के करीब 66 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल या तो ग्रीन एरिया के रूप में हो रहा था या फिर सोसायटी के लोगों और मेहमानों की पार्किंग के तौर पर। पीठ ने स्पष्ट किया कि सड़क से संबंधित इस तरह के बदलावों को किसी भी नजरिए से मामूली नहीं कहा जा सकता।

अधूरे वादों पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बिल्डर को कई बार मौके दिए गए, लेकिन यह समझ से परे है कि अभी तक हालात क्यों नहीं बदले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट को ब्रोशर के वादों के अनुरूप ढालने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अदालत कड़े और उचित आदेश पारित करेगी।

इसके साथ ही, अदालत ने सड़क के लिए जरूरी जमीन न देने और इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने को लेकर हरियाणा सरकार और उसके अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने सोसायटी के निवासियों की आरडब्ल्यूए (RWA) चुनाव से जुड़ी समस्याओं पर भी सरकारी अफसरों की निष्क्रियता पर गहरा असंतोष जताया है।