September 15, 2026

मेघालय में ‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चा, BJP के पाले में आएंगे 9 विधायक?

PM Modi addresses the nation on the occasion of National Space Day 2025

नई दिल्ली : मेघालय के राजनीतिक गलियारों में एक बड़े उलटफेर की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिससे सत्ताधारी गठबंधन के समीकरण बदल सकते हैं। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली एनपीपी (NPP) गठबंधन सरकार की सहयोगी पार्टी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के 9 विधायक कथित तौर पर पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें

मेघालय में बीजेपी के वरिष्ठ विधायक अलेक्जेंडर लालू हेक ने हाल ही में दावा किया था कि कई मौजूदा विधायक पार्टी के संपर्क में हैं। इन चर्चाओं को तब और बल मिला जब UDP विधायकों ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसे विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) और राज्य के विकास से जुड़ी बैठक बताया था, लेकिन राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इस बैठक के गहरे सियासी मायने हैं।

UDP के भीतर कलह और नाराजगी

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम UDP के भीतर चल रही गहरी गुटबाजी का परिणाम है:

  • कई विधायक पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह की कार्यशैली से नाराज चल रहे हैं।

  • लिंगदोह को मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का बेहद करीबी माना जाता है, जिससे विधायकों में असंतोष पनप रहा है।

  • हाल ही में हुई पार्टी की केंद्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में कुछ विधायकों ने तीखी बहस के बाद वॉकआउट भी किया था।

दल-बदल कानून का गणित

मेघालय की 60 सदस्यीय विधानसभा में UDP के पास फिलहाल 12 विधायक हैं। दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की कार्रवाई से बचने के लिए विलय हेतु दो-तिहाई विधायकों (कम से कम 8) की जरूरत होती है। यदि 9 विधायकों का गुट बगावत कर बीजेपी में जाता है, तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा।

क्या होगा पावर बैलेंस पर असर?

अगर मेघालय में यह प्रस्तावित बगावत सफल होती है, तो सत्ताधारी गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा:

  • बीजेपी की ताकत में इजाफा: विधानसभा में बीजेपी के अभी केवल 2 विधायक हैं। यह संख्या बढ़कर सीधे 11 हो जाएगी, जो राज्य के इतिहास में बीजेपी का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा।

  • कैबिनेट में हिस्सेदारी: संख्या बल बढ़ने पर बीजेपी सरकार में ज्यादा अहम मंत्री पदों की मांग कर सकती है, जिससे उसकी मोल-भाव की क्षमता काफी मजबूत हो जाएगी।

  • UDP को भारी नुकसान: 9 विधायकों के टूटने पर क्षेत्रीय पार्टी UDP के पास केवल 3 विधायक ही बचेंगे, जो उसके सियासी वजूद के लिए एक बड़ा झटका होगा।