September 15, 2026

भागवत के ‘एकता’ बयान पर सिब्बल का तंज, ‘घर में चुप्पी’

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में ‘विविधता में एकता’ और हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर दिए गए बयान पर देश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी और टीएमसी ने भागवत के बयान पर निशाना साधते हुए संघ की कथनी और करनी पर तीखे सवाल उठाए हैं।

सिब्बल और अल्वी ने पूछे सवाल

कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि केवल शब्द मायने नहीं रखते, काम बोलना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भागवत विदेश में समझदारी भरी बातें करते हैं, लेकिन घर में चुप्पी साध लेते हैं।

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भागवत के बयान को अपनी छवि सुधारने का ढोंग करार दिया। अल्वी ने सवाल किया कि अगर भारत में हिंदू-मुसलमान का कोई मसला ही नहीं है, तो अचानक अमेरिका जाकर यह बोलने की क्या जरूरत पड़ गई। उनके मुताबिक, वहां जाकर इस मुद्दे को उठाने का सीधा मतलब है कि देश में समस्या मौजूद है।

TMC और AIMPLB की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने दूसरे समुदायों के प्रति सहिष्णुता और दोस्ती की बात को सकारात्मक बताया। इसके साथ ही उन्होंने संघ की विचारधारा पर संदेह जताते हुए कहा कि आरएसएस एक बेहद कट्टर हिंदू संगठन है, इसलिए वे नहीं जानते कि भागवत वास्तव में अपनी कही बातों पर विश्वास करते हैं या नहीं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इस बयान से भारतीय समुदाय में एक सकारात्मक संदेश गया है, लेकिन इसे देश में जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने राजनीति में व्यक्तिगत हितों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ज्यादातर राजनेता आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अपने निजी हितों के लिए काम कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क में क्या बोले थे भागवत?

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में 6000 से अधिक लोगों की सभा को संबोधित किया था।

उन्होंने कहा था कि ‘विविधता में एकता’ भारत के डीएनए का हिस्सा है। भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह खुद भी हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू होने का अर्थ यह मानना है कि अलग-अलग रास्ते एक ही मंजिल तक पहुंचते हैं और इंसानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।