September 15, 2026

’40 साल में इंसेफेलाइटिस से 50 हजार मौतें, कोई सुध लेने नहीं आया’- योगी

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देवरिया: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस सरकारों पर बड़ा सियासी हमला बोला है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल में दशकों तक कहर बरपाने वाली बीमारी इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) और प्रदेश की कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि इस बीमारी से 40 वर्षों में 50 हजार से ज्यादा मासूमों की जान चली गई, लेकिन तत्कालीन सरकारें इन मौतों पर पूरी तरह संवेदनहीन बनी रहीं।

इंसेफेलाइटिस को बताया ‘बीमार मानसिकता’

मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल की इस पुरानी त्रासदी के लिए पिछली सरकारों की लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस सिर्फ एक बीमारी नहीं थी, बल्कि यह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की सरकारों की एक ‘बीमार मानसिकता’ थी। उनके मुताबिक, मासूम बच्चों की लगातार हो रही मौतों के बावजूद उस दौर के शासन और प्रशासन ने हालात को कभी गंभीरता से नहीं लिया।

‘किसी CM या PM ने गरीब परिवारों की सुध नहीं ली’

देवरिया के मंच से योगी आदित्यनाथ ने पुराने आंकड़े गिनाते हुए विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि चार दशकों के भीतर पूर्वांचल में 50 हजार से अधिक बच्चों ने इस बीमारी के कारण दम तोड़ दिया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी जनहानि के बावजूद न तो सपा और कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री प्रभावित इलाकों की स्थिति देखने आया, और न ही कांग्रेस के किसी प्रधानमंत्री ने उन गरीब परिवारों का हाल जानने की कोशिश की, जिन्होंने अपने बच्चे खो दिए थे।

माफिया राज और ‘बीमारू राज्य’ के टैग पर निशाना

स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी पूर्ववर्ती सरकारों को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने दौर में पूरे उत्तर प्रदेश के अंदर समानांतर रूप से माफिया का शासन चलता था।

अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए योगी ने दावा किया कि आज प्रदेश की स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब उत्तर प्रदेश को कोई ‘बीमारू राज्य’ (Bimaru State) नहीं कहता है और प्रदेश ने पूरे देश में अपनी एक सम्मानजनक पहचान स्थापित की है।

आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख और अखिलेश यादव की पार्टी तथा कांग्रेस पर किए गए सीधे प्रहार को एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।