BRS से कांग्रेस में गए विधायक दानम नागेंद्र को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

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तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (BRS) छोड़कर सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल होने वाले पूर्व विधायक दानम नागेंद्र (Danam Nagender) को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार (24 सितंबर) को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने खुद को अयोग्य घोषित करने वाले तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नागेंद्र की दलबदल की राजनीति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आपका मामला ‘आया राम, गया राम, फिर आया राम’ जैसा है।”

जस्टिस बागची की सख्त टिप्पणी

यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष था। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी दानम नागेंद्र की ओर से पेश हुए। पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नजर नहीं आता। इसी दौरान जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से दलबदल की राजनीति पर तंज कसते हुए वह ‘आया राम, गया राम’ वाली टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हाई कोर्ट का अयोग्यता आदेश पूरी तरह से लागू रहेगा, जिसका मतलब है कि नागेंद्र की खैराताबाद (Khairatabad) विधानसभा सीट रिक्त (खाली) मानी जाएगी।

दानम नागेंद्र की प्रतिक्रिया: ‘चुनाव में फिर ताकत दिखाऊंगा’

सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद दानम नागेंद्र ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का जो भी आदेश आया है, मैं उसका पूरा सम्मान करता हूं और स्वागत करता हूं। मैं इसे नकारूंगा नहीं। जब भी खैराताबाद में चुनाव होंगे, मैं एक बार फिर अपनी ताकत दिखाऊंगा। मैं खैराताबाद के लोगों के दिलों में बसता हूं। आज मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना में बहुत तेजी से विकास हो रहा है।”

क्या है पूरा मामला और विवाद की जड़?

दानम नागेंद्र ने साल 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनावों में BRS के टिकट पर खैराताबाद सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक यू-टर्न लिया। विधानसभा सदस्य रहते हुए ही उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा।

विवाद का घटनाक्रम:

  • BRS और BJP की याचिका: BRS विधायक पाडी कौशिक रेड्डी और BJP विधायक एलेटी महेश्वर रेड्डी ने दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी।

  • स्पीकर का फैसला: शुरुआत में तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

  • हाई कोर्ट का फैसला: स्पीकर के फैसले को तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 18 सितंबर को हाई कोर्ट की बेंच (चीफ जस्टिस अपारेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहिउद्दीन) ने स्पीकर के आदेश को रद्द कर दिया।

  • अयोग्यता की तारीख: हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागेंद्र 23 अप्रैल 2024 (लोकसभा चुनाव के मतदान के दिन) से ही अयोग्य हो गए थे, क्योंकि BRS का विधायक रहते हुए दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना दलबदल के बराबर है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाने के बाद अब खैराताबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है। चुनाव आयोग को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है।