‘मुसलमानों की चूड़ी टाइट करने से हिंदू वोट मिलेगा’, UCC पर मौलाना साजिद रशीदी
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता को लेकर चल रही देशव्यापी बहस के बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का एक बड़ा और तल्ख बयान सामने आया है। मौलाना रशीदी ने सीधे तौर पर कहा है कि सरकार चाहे कितने भी सख्त कानून बना ले, लेकिन मुसलमान अपने धार्मिक मामलों में केवल कुरान के निर्देशों का ही पालन करेंगे।
‘मुसलमानों की चूड़ी टाइट करने से हिंदू वोट मिलेगा’
अपने बयान में मौलाना साजिद रशीदी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विरोधी दलों, दोनों पर मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “लोगों को लगता है कि जितना मुसलमानों की चूड़ी टाइट होगी, उतना ही हिंदू वोट बीजेपी को पड़ेगा। भारतीय जनता पार्टी अपना वोट बैंक बनाने के लिए इस तरह के कानून ला रही है, जबकि विरोधी दल इसे मुस्लिम विरोधी बताकर अपना वोट बैंक साध रहे हैं।”
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि “मुसलमान की चूड़ी कोई टाइट नहीं है। आप मुसलमान को छोड़ दीजिए, उसे आपसे न रोजगार चाहिए, न स्वास्थ्य और न ही शिक्षा। आप ये सब सिर्फ हिंदुओं को दे दो।”
‘निकाह, तलाक और हिस्सेदारी कुरान के हिसाब से होगी’
यूसीसी लागू होने पर मुस्लिम समाज के रुख को स्पष्ट करते हुए मौलाना रशीदी ने कहा कि मुसलमान केवल अल्लाह और अपने नबी को मानता है। “आप इससे भी सख्त कानून ले आओ, हम तब भी वही मानेंगे (जो कुरान में है)। हम आपकी तो नहीं मानेंगे। हम निकाह भी अपने हिसाब से करेंगे, तलाक भी अपने हिसाब से करेंगे और बच्चों की संपत्ति में जो हिस्सेदारी होगी, वह भी कुरान के हिसाब से ही करेंगे। हम इस मामले में बिल्कुल देश का कानून नहीं मानेंगे,” मौलाना ने साफ शब्दों में कहा। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान ने मुसलमानों को अपने धर्म के अनुसार व्यक्तिगत मामलों को तय करने का अधिकार दिया है और वे उसी पर अमल करेंगे।
सरकार से बुनियादी मुद्दों पर पूछे सवाल
मौलाना रशीदी ने उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने का हवाला देते हुए सरकार से कई तीखे सवाल किए। उन्होंने पूछा, “क्या यूसीसी आने से उत्तराखंड में महंगाई कम हो गई? क्या लोगों को रोजगार और अच्छी शिक्षा मिल गई? अगर ये सब चीजें हो गई हैं, तो हम कहते हैं कि पूरे देश में यूसीसी ले आओ। लेकिन यूसीसी आने के बाद भी अगर युवा सड़कों पर घूम रहे हैं, तो यह सरकार के लिए शर्म की बात है।”
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपी में 26 हजार स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। सरकार को पहले इन जरूरी मुद्दों पर काम करना चाहिए, बजाय धार्मिक मामलों में दखल देने के।
