लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर गरजा बुलडोजर, नाराज अधिवक्ताओं की चेतावनी- ‘2027 में देंगे जवाब’
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोर्ट परिसर के पास अवैध तरीके से बनाए गए वकीलों के चैंबरों पर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। नाले और फुटपाथ पर किए गए इस अतिक्रमण को ढहाने के लिए निगम की टीम 10 बुलडोजर और मलबा हटाने वाले 10 हाइवा ट्रकों के साथ मौके पर पहुंची। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसका वकीलों ने कड़ा विरोध किया।
वकीलों का हंगामा और 2027 की चेतावनी
चैंबर तोड़े जाने से नाराज वकीलों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अधिवक्ताओं ने मौके पर जमकर नारेबाजी की और ध्वस्तीकरण को तत्काल रोकने की मांग पर अड़ गए। प्रशासन और पुलिस की सख्ती के बीच वकीलों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए चेतावनी दी कि नगर निगम की इस कार्रवाई का जवाब 2027 के चुनावों में दिया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश पर हो रहा एक्शन
नगर निगम के जोनल अधिकारी ओम प्रकाश सिंह के मुताबिक, हाईकोर्ट के सख्त आदेश के तहत कचहरी परिसर के बाहर नाले, नालियों, फुटपाथ और सड़क पर बने सभी अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं। अतिक्रमण हटाने से पहले संबंधित लोगों को नोटिस भी जारी किए गए थे।
नगर निगम ने पिछले साल सर्वे कर 211 ऐसे चैंबरों को चिह्नित किया था, जो पूरी तरह से अवैध तरीके से नालों और सड़क किनारे बनाए गए थे। इस कार्रवाई के खिलाफ वकील हाईकोर्ट भी पहुंचे थे, लेकिन अदालत ने उनकी अपील को खारिज कर दिया था। नोटिस के जवाब में आई 14 आपत्तियों का नगर निगम पहले ही निस्तारण कर चुका है।
पहले टली थी कार्रवाई, सर्वे में मिले थे 241 चैंबर
ध्वस्तीकरण का यह अभियान पहले 11 अक्टूबर को प्रस्तावित था। आपत्तियों के निस्तारण और अदालत में अपील लंबित होने के कारण उस वक्त इसे टाल दिया गया था।
करीब एक साल पहले हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका के आधार पर नगर निगम ने कैसरबाग स्थित पुराने हाईकोर्ट परिसर, जिला सत्र न्यायालय, निबंधन कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय के आसपास की सड़कों का सर्वे किया था। उस दौरान कुल 241 अवैध चैंबर चिह्नित हुए थे। इनमें से मई से अगस्त के बीच दो अलग-अलग चरणों में 72 चैंबर पहले ही तोड़े जा चुके हैं। बाकी बचे अवैध निर्माणों पर अब अंतिम कार्रवाई की जा रही है।
