लखीमपुर खीरी हिंसा मामला: आशीष मिश्रा से जुड़े केस में प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए जज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
अक्टूबर 2021 में हुए बहुचर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले (Lakhimpur Kheri Violence Case) में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा से जुड़े मुकदमे की सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस मामले में प्रदर्शन कर रहे किसानों को कथित तौर पर वाहनों से कुचल दिया गया था, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने निचली अदालत के संबंधित न्यायाधीश की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कई गंभीर सवाल खड़े किए।
जज की कार्यप्रणाली पर प्रशांत भूषण के आरोप
प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले की सुनवाई कर रहे जज से जुड़े कुछ ‘परेशान करने वाले घटनाक्रम’ सामने आए हैं। उन्होंने अदालत में आरोप लगाया कि संबंधित जज ने एनडीपीएस (NDPS) और एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट से जुड़े कई मामलों को अपने पास लिया और उनमें जमानत दी। यहां तक कि जब सुनवाई अंतिम चरण में थी, तब कुछ मामलों में आरोपियों को बरी भी कर दिया गया।
भूषण ने आरोप लगाते हुए कहा कि केवल इसी मामले में नहीं, बल्कि कई अन्य मामलों में भी संबंधित जज के फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ चुके हैं।
प्रत्यक्षदर्शी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट का मुद्दा
लखीमपुर खीरी मामले का जिक्र करते हुए प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि जज ने पहले एक महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी (गवाह) के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया था।
भूषण के मुताबिक, उस प्रत्यक्षदर्शी ने डॉक्टर का आधिकारिक प्रमाणपत्र (मेडिकल सर्टिफिकेट) देकर अदालत को अपनी बीमारी की जानकारी दी थी। इसके बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि पुलिस जब उस गवाह के पास पहुंची, तो उसने पेश होने से यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि वह अब इस मामले में अदालत में उपस्थित नहीं होना चाहता।
‘जज के खिलाफ जांच शुरू’
वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि कार्यप्रणाली को लेकर उठी चिंताओं के बाद अब इस जज के खिलाफ जांच भी शुरू कर दी गई है। प्रशांत भूषण की इन दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले की कार्यवाही पर करीब से नजर बनाए हुए है।
