चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों पर बवाल, राहुल गांधी बोले- ये देशद्रोह; पढ़ें किसने क्या कहा
क्या देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग (ECI) के भीतर ही मतभेद चल रहे हैं? क्या महत्वपूर्ण फैसलों पर चुनाव आयोग की टीम बंटी हुई है? इन सवालों ने देश की राजनीति में एक नया और गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है।
हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग ने पिछले 10 महीनों में कई ऐसे फैसले लिए, जिन पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी सहमत नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े कई बदलावों पर कम से कम 14 बार अपनी असहमति दर्ज कराई थी, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस रिपोर्ट के सामने आते ही पूरा विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हो गया है।
रिपोर्ट में क्या हैं अहम दावे?
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों में से चार ऐसे मुद्दे थे, जिनका सीधा संबंध चुनावी प्रक्रिया से था:
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नए मतदाताओं को जोड़ने में नियमों की कथित अनदेखी।
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मतदाता सूची (Voter List) पर केंद्रीकृत नियंत्रण।
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पश्चिम बंगाल में करीब 34 लाख मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखने के खिलाफ दायर अपील।
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गोवा में 97 पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा न जोड़ने का मामला।
चूंकि चुनाव आयोग मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों का संयुक्त निकाय होता है, इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या अहम फैसले केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के स्तर पर ही लिए जा रहे हैं? हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी संस्थान में अलग-अलग राय और सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है और इसे मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विपक्ष का चौतरफा हमला: किसने क्या कहा?
राहुल गांधी (कांग्रेस): ‘यह देशद्रोह का काम है’ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक क्राइम है। हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले बीजेपी, आरएसएस और इलेक्शन कमीशन ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।”
कपिल सिब्बल (पूर्व केंद्रीय मंत्री): सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी): सपा प्रमुख ने चिंता जताते हुए कहा, “यदि ऐसे आरोप सही हैं तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।”
ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस): पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन किया जाएगा।
अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी): दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की, “हमारी मांग है कि पिछले 3 सालों में जितने बदलाव वोटर लिस्ट के अंदर किए गए हैं, वे सभी खारिज करके 3 साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए।” वहीं, आप नेता मनीष सिसोदिया ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT): उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र में मनमानी नहीं चल सकती और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता हर हाल में बनी रहनी चाहिए।
असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM): ओवैसी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर पूछा कि यदि आयोग के अधिकांश सदस्य (दो चुनाव आयुक्त) किसी फैसले से सहमत नहीं थे, तो ऐसे फैसलों की कानूनी वैधता क्या रह जाती है? उन्होंने कहा कि समय के साथ चुनाव आयोग पर लोगों के भरोसे में कमी आई है।
योगेंद्र यादव (स्वराज इंडिया): योगेंद्र यादव ने सवाल उठाया, “बड़ा सवाल यह है कि अगर दोनों चुनाव आयुक्त इन फैसलों को गलत या गैरकानूनी मानते थे, तो उन्होंने इसे रोकने के लिए क्या किया? क्या चुपचाप असहमति दर्ज करना ही पर्याप्त था?”
भाजपा ने किया बचाव
दूसरी ओर, भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव किया है। पार्टी का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है और इसे संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनावी धांधली और संस्थाओं के दुरुपयोग का पुराना इतिहास खुद कांग्रेस से जुड़ा रहा है।
फिलहाल, रिपोर्ट के दावों और चुनाव आयोग की सफाई के बीच यह विवाद एक बड़ी संवैधानिक और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।
