UN में गरजे एस. जयशंकर: ‘युद्ध के मैदान में नहीं निकलेगा समाधान’, आतंकवाद पर बिना नाम लिए पाकिस्तान को दिया सख्त संदेश

jaishankar

दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्धों का असर अब केवल युद्धग्रस्त क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोग भी महंगाई, महंगे ईंधन और खाद्य संकट के रूप में इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। इसी गंभीर मुद्दे को उठाते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर दुनिया को बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने का स्पष्ट संदेश दिया है।

यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट पर भारत का रुख

25 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र (UN) दिवस के अवसर पर आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में बोलते हुए एस. जयशंकर ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन युद्धों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति की मेज पर निकाला जाना चाहिए।

जयशंकर ने चिंता जताते हुए कहा कि इन संघर्षों के कारण दूर देशों के लोग भी आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया इन बिगड़ते हालातों पर सिर्फ मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकती। भारत ने खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में पेश करते हुए शांति की दिशा में अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

आतंकवाद पर बिना नाम लिए पाकिस्तान को आईना

अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने आतंकवाद को विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। बिना नाम लिए पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल राजनीतिक या सरकारी रणनीति (State Policy) के तौर पर करना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सभी देशों से एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने और मजबूत संकल्प दिखाने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की उठाई मांग

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी निर्णय लेने वाली संस्थाओं में तत्काल सुधार (UN Reforms) की जरूरत पर भी जोर दिया। ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की एक बड़ी आबादी को वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता।

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा सीमाओं और कमियों को स्वीकारते हुए कहा कि बदलती दुनिया में बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रासंगिक बनाना बेहद जरूरी है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता और विकासशील देशों के उचित प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।