अमेरिका में ‘AI’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक, ट्रंप ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम बदलकर किया ‘सुपर इंटेलिजेंस’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तकनीकी जगत में एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) का आधिकारिक नाम बदलने का आदेश दिया है। ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद अमेरिकी संघीय सरकार के सभी विभागों और आधिकारिक कामकाज में अब AI की जगह ‘सुपर इंटेलिजेंस’ (SI) शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकारी दस्तावेजों, नीतिगत फैसलों और पत्राचार में अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द को मान्यता नहीं मिलेगी।
असाधारण क्षमता और वादों को दर्शाने के लिए बदला नाम
एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में स्पष्ट किया गया है कि सरकार द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली तकनीक की असाधारण क्षमताओं और अमेरिकी जनता के लिए इसके असीम अवसरों को सही ढंग से दर्शाने वाली होनी चाहिए।
आदेश के पाठ में कहा गया है, “सुपर इंटेलिजेंस शब्द इस तकनीक के वादों, संभावनाओं और तेजी से बढ़ती ताकत को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करता है। इसलिए मेरे प्रशासन की नीति है कि कानून के तहत कार्यकारी शाखा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जगह सुपर इंटेलिजेंस (SI) शब्द का ही इस्तेमाल करेगी।”
व्हाइट हाउस में टेक दिग्गजों के साथ अहम बैठक
नाम बदलने के इस आदेश के साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दुनिया के प्रमुख टेक लीडर्स के साथ ‘सुपर इंटेलिजेंस’ पर एक उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, एक्सएआई (xAI) के प्रमुख एलन मस्क सहित कई शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के तुरंत बाद मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने बताया कि टेक कंपनियों के साथ मिलकर सुरक्षा मानकों और तकनीक की निगरानी को लेकर सहमति बन गई है। उन्होंने जानकारी दी कि टेक कंपनियां तकनीक के विकास और सुरक्षा के लिए स्वेच्छा से खुद का निगरानी तंत्र तैयार कर रही हैं।
‘सुपर इंटेलिजेंस’ पर मस्क, पिचाई और जुकरबर्ग का रुख
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान तीनों प्रमुख टेक लीडर्स ने तकनीक के भविष्य, जोखिमों और इसके प्रभाव पर अपनी कार्ययोजना साझा की:
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सुंदर पिचाई (Google): गूगल सीईओ ने इस पल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इंडस्ट्री को तकनीक से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से समझना और संभालना होगा। पिचाई ने बताया कि राष्ट्रपति ने उद्योग जगत से आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेने को कहा है।
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मार्क जुकरबर्ग (Meta): जुकरबर्ग ने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता जनता और यूजर्स में भरोसा कायम करना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग निश्चिंत रहें कि तकनीक ठीक उसी तरह काम कर रही है, जैसा सोचा गया है।
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एलन मस्क (xAI): मस्क ने दावा किया कि सुपर इंटेलिजेंस से स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे और पूरी दुनिया को इसका सीधा लाभ मिलेगा। तकनीक के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले असर के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि समय के साथ काम करने के तरीके हमेशा बदलते रहे हैं।
