उमर खालिद और शरजील इमाम को HC से बड़ा झटका, तीसरी जमानत याचिका खारिज

delhi

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े कथित वृहत साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज इस मामले में दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों पिछले करीब छह साल से जेल में बंद हैं और निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला

दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने तीसरी बार दाखिल की गई इन जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के फैसले में कोई बदलाव नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में तय किया था कि दोनों आरोपी गवाही पूरी होने या इस आदेश के पारित होने की तारीख से एक साल की अवधि बीत जाने (इनमें से जो भी पहले हो) के बाद ही जमानत के लिए नया आवेदन कर सकते हैं।

पुलिस ने बताया मुख्य साजिशकर्ता, 2020 से हैं जेल में

इस मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाई कोर्ट में दोनों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। पुलिस ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली दंगों का मुख्य साजिशकर्ता करार दिया।

गिरफ्तारी के रिकॉर्ड के अनुसार, शरजील इमाम को 25 अगस्त 2020 को पुलिस ने पकड़ा था, जबकि उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। तब से लेकर अब तक दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।

सीएए-एनआरसी विरोध के बाद भड़की थी हिंसा

फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के इन सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पुलिस ने इस पूरी हिंसा के पीछे एक बड़ी साजिश का आरोप लगाते हुए UAPA के तहत मामला दर्ज किया। उमर और शरजील के अलावा इस मामले में एक्टिविस्ट खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

शरजील इमाम को मिली 7 दिन की अंतरिम राहत

नियमित जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद, शरजील इमाम को अक्टूबर महीने में एक पारिवारिक कार्यक्रम के लिए जेल से बाहर आने की मोहलत मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए उसे सात दिन की अंतरिम जमानत दी है। इस आदेश के तहत शरजील 4 से 10 अक्टूबर तक जेल से बाहर रह सकेगा।